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Flexi Cap Funds फिर बना इक्विटी का किंग, अक्टूबर में निवेश बढ़कर ₹8,929 करोड़

फ्लेक्सी कैप फंड्स में लगातार बढ़ते इनफ्लो से संकेत मिलता है कि निवेशक अब डाइवर्सिफाइड स्ट्रैटेजीज को ज्यादा पसंद कर रहे हैं Flexi Cap Funds: शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच फ्लेक्सी कैप फंड्स का जलवा बरकरार है। भले ही,…

Last Updated: मई 11, 2026 | 9:09 AM

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फ्लेक्सी कैप फंड्स में लगातार बढ़ते इनफ्लो से संकेत मिलता है कि निवेशक अब डाइवर्सिफाइड स्ट्रैटेजीज को ज्यादा पसंद कर रहे हैं

Flexi Cap Funds: शेयर बाजार में जारी उतार-चढ़ाव के बीच फ्लेक्सी कैप फंड्स का जलवा बरकरार है। भले ही, अक्टूबर में लगातार तीसरे महीने म्युचुअल फंड्स की इक्विटी स्कीम्स में इनफ्लो 19 फीसदी घटकर 24,690 करोड़ रुपये रह गया। लेकिन फ्लेक्सी कैप फंड्स पर निवेशकों ने जमकर दांव लगाया। एसोसिएशन ऑफ म्युचुअल फंड्स इन इंडिया (AMFI) के आंकड़ों के मुताबिक, अक्टूबर में फ्लेक्सी कैप फंड्स में सबसे ज्यादा निवेश आया। निवेशकों ने इन फंड्स में कुल 8,929 करोड़ रुपये का निवेश किया, जबकि सितंबर में इस कैटेगरी में 7,029 करोड़ रुपये का इनफ्लो आया था। इसके उलट इक्विटी म्युचुअल फंड की ज्यादातर कैटेगरी में इनफ्लो सुस्त रहा।

Flexi Cap Funds में जमकर बरसा पैसा

बाजार के उतार-चढ़ाव में सुरक्षित माने जाने वाले फ्लेक्सी कैप फंड्स पर निवेशकों का भरोसा लगातार मजबूत हो रहा है। इस बात की गवाही, खुद इस कैटेगरी में बढ़ता इनफ्लो देता है। जनवरी 2025 में फ्लेक्सी कैप फंड्स में 5,698 करोड़ रुपये का निवेश आया था, जो अक्टूबर 2025 तक बढ़कर 8,929 करोड़ रुपये पर पहुंच गया है। कुल मिलाकर, साल 2025 में अब तक इस कैटेगरी में 62,825 करोड़ रुपये का निवेश देखने को मिला है।

Month Inflow (Rs in Crore) January 5,698 Feburary 5,104 March 5,615 April 5,542 May 3,842 June 5,733 July 7,654 August 7,679 September 7,029 October 8,929

Source- AMFI

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डाइवर्सिफाइड स्ट्रैटेजीज पर बढ़ रहा भरोसा

फ्लेक्सी कैप फंड्स में लगातार बढ़ते इनफ्लो से संकेत मिलता है कि निवेशक अब डाइवर्सिफाइड स्ट्रैटेजीज को ज्यादा पसंद कर रहे हैं। मिरे असेट इनवेस्टमेंट मैनेजर्स (इंडिया) की हेड ऑफ डिस्ट्रीब्यूशन एंड स्ट्रैटेजिक अलायंसेज सुरंजना बोरठाकुर ने कहा कि इक्विटी कैटेगरी में फ्लेक्सी-कैप फंड्स में लगातार निवेश आ रहा है। यह दिखाता है कि निवेशक अब डाइवर्सिफाइड स्ट्रैटेजीज को अधिक पसंद कर रहे हैं।

ऑम्नीसाइंस कैपिटल के सीईओ और चीफ इन्वेस्टमेंट स्ट्रैटेजिस्ट डॉ. विकास गुप्ता ने कहा, “फ्लेक्सी कैप कैटेगरी में पिछले महीने की तुलना में इनफ्लो में वृद्धि हुई है, जबकि अधिकांश अन्य इक्विटी कैटेगरियों में इनफ्लो कम रहे और कुल मिलाकर इक्विटी इनफ्लो भी घटे हैं। ऐसा लगता है कि निवेशकों और डिस्ट्रिब्यूटर्स का लार्ज, मिड या स्मॉलकैप जैसी कैटेगरी में भरोसा कम हो रहा है।”

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Flexi Cap Funds का AUM रिकॉर्ड ₹5.34 लाख करोड़

फ्लेक्सी कैप फंड्स ने म्युचुअल फंड इंडस्ट्री में नया कीर्तिमान स्थापित किया है। इस कैटेगरी का एसेट अंडर मैनेजमेंट (AUM) अब 5.34 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया है। खास बात यह है कि फ्लेक्सी कैप फंड्स 5 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार करने वाली पहली डायवर्सिफाइड इक्विटी कैटेगरी है, जिसने यह ऐतिहासिक उपलब्धि सितंबर महीने में ही हासिल कर ली थी।

फ्लेक्सी कैप फंड्स एक तरह के इक्विटी म्युचुअल फंड हैं, जहां फंड मैनेजर को किसी एक मार्केट कैप (लार्ज, मिड या स्मॉल) तक सीमित नहीं रखा जाता। फंड मैनेजर के पास पूरी आजादी होती है कि वह बदलते बाजार के हिसाब से पोर्टफोलियो को एडजस्ट कर सकते है।

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अन्य इक्विटी फंड्स में सुस्ती

AMFI के आंकड़ों के मुताबिक, फ्लेक्सी कैप फंड्स के उलट इक्विटी म्युचुअल फंड की ज्यादातर कैटेगरी में सुस्ती देखने को मिली। स्मॉल-कैप फंड्स में इनफ्लो घटकर 3,476 करोड़ रुपये रह गया, जो एक महीने पहले 4,363 करोड़ रुपये था। वहीं मिड-कैप फंड्स में इससे भी तेज गिरावट आई और इनफ्लो 5,085 करोड़ रुपये से घटकर 3,807 करोड़ रुपये पर आ गया।

लार्ज-कैप फंड्स में निवेश तेजी से घटकर 972 करोड़ रुपये रह गया, जबकि पिछले महीने इसमें 2,319 करोड़ रुपये का निवेश आया था। दूसरी ओर, ELSS कैटेगरी से करीब 666 करोड़ रुपये और डिविडेंड यील्ड फंड्स से 179 करोड़ रुपये की की निकासी हुई।

बोरठाकुर ने कहा कि स्मॉल कैप, मिडकैप और लार्ज कैप कैटेगरी में निवेश घटा है। इसकी एक वजह मुनाफावसूली (profit booking) और सीमित दायरे में चल रहे बाजार के बीच निवेशकों का सतर्क रुख है।

 

First Published - नवंबर 22, 2025 | 11:23 AM IST
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Last Updated: अप्रैल 4, 2026 | 7:31 PM IST

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फ्लेक्सीकैप व गोल्ड ईटीएफ बने पसंदीदा, मिड और स्मॉलकैप फंड्स की चमक पड़ी फीकी

तीन सबसे ज्यादा जोखिम वाली इक्विटी स्कीम श्रेणियों- मिडकैप, स्मॉलकैप और सेक्टोरल एवं थीमैटिक- में कुल नए खाते या फोलियो जुड़ने की दर लगातार तीन महीनों से घट रही है…

aarti gosavi

Last Updated: मार्च 11, 2026 | 4:34 PM IST

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तीन सबसे ज्यादा जोखिम वाली इक्विटी स्कीम श्रेणियों- मिडकैप, स्मॉलकैप और सेक्टोरल एवं थीमैटिक- में कुल नए खाते या फोलियो जुड़ने की दर लगातार तीन महीनों से घट रही है

म्युचुअल फंड (एमएफ) क्षेत्र में निवेशकों की दिलचस्पी में बदलाव दिख रहा है। हाल के महीनों में स्मॉलकैप, मिडकैप और सेक्टोरल फंडों में नए निवेश खातों के खुलने और शुद्ध निवेश में उनकी हिस्सेदारी में गिरावट आई है। इसके विपरीत कमोडिटी एक्सचेंज-ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) और फ्लेक्सीकैप योजनाएं अपने मजबूत प्रदर्शन के कारण लोकप्रियता के चार्ट पर ऊपर पहुंच गई हैं।

तीन सबसे ज्यादा जोखिम वाली इक्विटी स्कीम श्रेणियों- मिडकैप, स्मॉलकैप और सेक्टोरल एवं थीमैटिक- में कुल नए खाते या फोलियो जुड़ने की दर लगातार तीन महीनों से घट रही है। ईटीएफ और फ्लेक्सीकैप फंडों के मामले में इसके विपरीत हुआ है और पिछले छह महीनों में कुल शुद्ध खाते जुड़ने की दर में बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा पिछले नौ महीनों में से सात में उन्होंने तीन इक्विटी श्रेणियों की तुलना में ज्यादा खाते जोड़े हैं।

ईटीएफ की बात करें तो ज्यादातर खाते गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में खुले हैं। विशेषज्ञों के अनुसार निवेशकों की प्राथमिकताओं में यह बदलाव मुख्यतः अल्पाव​धि के प्रदर्शन के प्रति पूर्वग्रह, परिसंपत्ति आवंटन और कमोडिटी निवेश के महत्त्व को समझने के कारण है। पिछले एक साल में आई गिरावट और अस्थिरता ने भी निवेशकों को जोखिम कम करने के लिए प्रेरित किया है।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के वरिष्ठ निवेश रणनीतिकार श्रीराम बीकेआर ने कहा, ‘चूंकि फ्लेक्सीकैप फंड लार्जकैप पूर्वग्रह के साथ लार्ज-, मिड- और स्मॉल-कैप शेयरों में तत्परता से पैसा लगाते हैं। इसलिए वे बाजार में अत्यधिक अस्थिरता के समय या अल्पाव​धि में उतार-चढ़ाव की आशंका के समय निवेशकों की पसंद बन जाते हैं। अगर हम सितंबर 2025 तक के 1 साल के रिटर्न को देखें तो फ्लेक्सीकैप फंडों ने मिडकैप, स्मॉलकैप और अधिकांश सेक्टर फंडों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है।’

शेयर डॉट मार्केट में इन्वेस्टमेंट प्रोडक्ट्स के प्रमुख नीलेश नाइक के अनुसार शुद्ध खाता वृद्धि और स्मॉल और मिडकैप फंडों में आने वाले निवेश में गिरावट का कारण मुनाफावसूली भी हो सकती है। उन्होंने कहा, ‘पिछले कुछ वर्षों में इन योजनाओं में खुदरा निवेशकों का अच्छा-खासा निवेश हुआ है। ये निवेशक आमतौर पर किसी फंड के पिछले प्रदर्शन के आधार पर निवेश करते हैं और उनके व्यवहार संबंधी पूर्वग्रह उनके निवेश और निकासी संबंधी फैसलों में अहम भूमिका निभाते हैं। पिछले कुछ महीनों में बाजार में आई तेजी को देखते हुए ऐसी श्रेणियों में खुदरा निवेशक मुनाफावसूली कर सकते हैं।’

निवेशकों की पसंद में बदलाव शुद्ध निवेश के आंकड़ों में भी दिखाई दे रहा है। फ्लेक्सीकैप फंड 5 लाख करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति के साथ सबसे बड़ी इक्विटी-फंड श्रेणी बनने की राह पर हैं। इन फंडों ने लगातार तीन महीनों में 7,000 करोड़ रुपये से अधिक का शुद्ध निवेश हासिल किया और अक्टूबर में यह लगभग 9,000 करोड़ रुपये पहुंच गया। मिडकैप, स्मॉलकैप और सेक्टोरल फंडों में कुल निवेश जुलाई 2025 में 21,093 करोड़ रुपये था जो अक्टूबर में घटकर 8,649 करोड़ रुपये रह गया है।

कीमती धातुओं में तेजी के बीच गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में रिकॉर्ड निवेश हो रहा है। नाइक ने कहा, ‘गोल्ड और सिल्वर ईटीएफ में निवेश में बढ़ोतरी मुख्य रूप से अगस्त के मध्य से सोने और चांदी की कीमतों में आई शानदार तेजी के कारण हुई। यह रुझान न केवल भारत में बल्कि वैश्विक बाजारों में भी देखा गया है।’

 

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