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IPO लंबी अवधि की पूंजी नहीं जुटा रहे, सिर्फ शुरुआती निवेशकों का एग्जिट बन रहे: CEA नागेश्वरन

नागेश्वरन ने कहा कि महत्त्वाकांक्षा, जोखिम उठाने और दीर्घकालिक निवेश की आवश्यकता है, अन्यथा भारत रणनीतिक लचीलेपन में पीछे रह जाएगा भारत के शेयर बाजार का काफी विस्तार हुआ है मगर आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लंबी अवधि की पूंजी जुटाने…

Last Updated: March 11, 2026 | 4:35 PM

हाइलाइट्स

नागेश्वरन ने कहा कि महत्त्वाकांक्षा, जोखिम उठाने और दीर्घकालिक निवेश की आवश्यकता है, अन्यथा भारत रणनीतिक लचीलेपन में पीछे रह जाएगा

भारत के शेयर बाजार का काफी विस्तार हुआ है मगर आरंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) लंबी अवधि की पूंजी जुटाने के तंत्र के बजाय शुरुआती निवेशकों के लिए बाहर निकलने का रास्ता बनता जा रहा है। यह प्रवृ​त्ति सार्वजनिक बाजार की भावना को कमजोर करती है। भारत के मुख्य आर्थिक सलाहकार वी अनंत नागेश्वरन ने भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) के कार्यक्रम में आज यह बात कही।

नागेश्वरन ने आगाह किया कि बाजार पूंजीकरण अनुपात या डेरिवेटिव्स ट्रेड की मात्रा जैसे गलत कीर्तिमान का जश्न नहीं मनाया जाना चाहिए क्योंकि ये बेहतर वित्तीय उपाय नहीं हैं बल्कि इससे घरेलू बचत के उत्पादक निवेश से दूर होने का जोखिम रहता है।

नागेश्वरन ने कहा, ‘हम विकसित दुनिया से कुछ बेहतरीन कार्यप्रणालियों को अपनाते हुए परिष्कृत और सुदृढ़ पूंजी बाजार विकसित करने में सफल रहे हैं। लेकिन इसने अल्पावधि आय प्रबंधन दृष्टिकोण को बढ़ाने में भी आंशिक रूप से योगदान दिया होगा क्योंकि ये प्रबंधन पारितो​षिक और बाजार पूंजीकरण में वृद्धि से जुड़े होते हैं, जो शेयर और ऑप्शंस आदि के मूल्य को भी बढ़ाते हैं।

नागेश्वरन ने कहा कि महत्त्वाकांक्षा, जोखिम उठाने और दीर्घकालिक निवेश की आवश्यकता है, अन्यथा भारत रणनीतिक लचीलेपन में पीछे रह जाएगा।

वर्ष 2025 के शीर्ष 15 आईपीओ द्वारा जुटाई गई लगभग 94,000 करोड़ रुपये की राशि में से तीन-चौथाई (लगभग 68,700 करोड़ रुपये) सेकंडरी शेयर बिक्री से प्राप्त हुई है। इन 15 आईपीओ में से 5 पूरी तरह से प्रवर्तकों या निजी इक्विटी कंपनियों द्वारा की गई बिक्री है। शेष 10 में प्राइमरी और सेकंडरी दोनों तरह की बिक्री शामिल रही है।

भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) के चेयरमैन तुहिन कांत पांडेय ने कहा, ‘प्राइमरी और सेकंडरी घटकों का मिश्रण एक आईपीओ से दूसरे आईपीओ में भिन्न होता है। कई कंपनियां पहले ही प्रारंभिक चरण में प्राथमिक पूंजी जुटा चुकी होती हैं, यही वजह है कि मौजूदा निवेशक अक्सर आईपीओ के दौरान ही बाहर निकल जाना पसंद करते हैं। ऐसे भी उदाहरण हैं जहां कंपनियां नई परियोजनाओं के लिए नई पूंजी जुटाती हैं। मेरे विचार से पूंजी बाजार को ऐसे सभी उद्देश्यों को पूरा करना चाहिए।’

मुख्य आ​र्थिक सलाहकार नागेश्वरन ने कहा, ‘अगर भारत को अपनी आकांक्षाओं को पूरा करना है तो धन जुटाने के प्राथमिक चालक देश के अंदर से आने चाहिए। बाहरी पूंजी हमारे प्रयासों का पूरक हो सकती है लेकिन रणनीतिक भार घरेलू संस्थानों पर होना चाहिए। अनिश्चितता को केवल घरेलू संस्थागत ताकत के द्वारा कम किया जा सकता है और हमारे वित्तीय क्षेत्र को स्थिरता के सबसे विश्वसनीय स्रोत के रूप में विकसित होना चाहिए।’

उन्होंने चेताया कि आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के उभार में आशंका यह है कि कही इसकी परिणति डॉट-कॉम बुलबुले की तरह न हो। अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष ने अपने वैश्विक आर्थिक दृष्टिकोण में इसे लेकर चेतावनी दी है।

उन्होंने कहा, ‘ हमें आत्मसंतुष्टि के प्रति सचेत रहना चाहिए। भारत अपने वित्तीय क्षेत्र को वास्तविक अर्थव्यवस्था से दूर नहीं जाने दे सकता, न ही हम अन्यत्र उत्पन्न हुई कमजोरियों को अपने बाजारों तक फैलने दे सकते हैं। स्थिरता, लचीलापन और राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के साथ समरूपता हमारी वित्तीय प्रणाली का आधार होना चाहिए।’

नागेश्वरन ने यह भी चेतावनी दी कि अनिश्चितता और तकनीकी असंतुलन से परिभाषित युग में सामान्य व्यवसाय वित्तपोषण पर्याप्त नहीं होगा।

नागेश्वरन ने कहा कि बैंकों और वित्तीय संस्थानों को अधिक साहसी, तकनीकी रूप से अधिक कुशल तथा सोच-समझकर जोखिम उठाने के लिए अधिक इच्छुक बनना होगा। उन्होंने कहा कि पिछले ऋण चक्रों ने घाव छोड़े हैं, जिसके कारण अल्पकालिक ऋण, भारी रेहन अंडरराइटिंग और नवप्रवर्तकों की तुलना में पुराने ऋणों को प्राथमिकता मिली है। यदि भारत को अगले दशक और उससे आगे के लिए उत्पादक क्षमता का निर्माण करना है तो हमारे वित्तीय संस्थानों को धैर्यपूर्वक, स्थिर पूंजी प्रदान करनी होगी जो उद्यमों को उनके संपूर्ण विकास पथ पर जरूरी ऋण आवश्यकताओं में सहायता प्रदान करे।

मुख्य आ​र्थिक सलाहकार ने कहा कि देश दीर्घकालिक वित्तपोषण के लिए मुख्य रूप से बैंक ऋण पर निर्भर नहीं रह सकता है। उन्होंने दीर्घकालिक उद्देश्यों के वित्तपोषण के लिए गहन बॉन्ड बाजार को ‘रणनीतिक आवश्यकता’ करार दिया। उन्होंने कहा, ‘बीमा और पेंशन फंड को दीर्घकालिक निवेश में बड़ी भूमिका निभानी चाहिए। बॉन्ड बाजार की इमारत विश्वास और पारदर्शिता की नींव पर बनाई जाए जिसके लिए कॉरपोरेट नेतृत्व को टिकाऊ और प्रदर्शन के आधार पर प्रतिबद्ध होना चाहिए।

First Published - November 21, 2025 | 5:58 AM IST
होम / बाजार / IPO / Upcoming IPOs This Week: इस हफ्ते दो IPO खुलने से बाजार में बढ़ेगी हलचल, वहीं सात कंपनियों की होगी लिस्टिंग

Upcoming IPOs This Week: इस हफ्ते दो IPO खुलने से बाजार में बढ़ेगी हलचल, वहीं सात कंपनियों की होगी लिस्टिंग

इस हफ्ते दो नए IPO खोले जाने और सात कंपनियों की लिस्टिंग होने की तैयारी बाजार में निवेशकों के लिए कई नए विकल्प उपलब्ध कराए जाने के संकेत के रूप…

aarti gosavi

Last Updated: March 11, 2026 | 4:35 PM IST

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हाइलाइट्स

  • इस हफ्ते दो नए IPO खोले जाने और सात कंपनियों की लिस्टिंग होने की तैयारी बाजार में निवेशकों के लिए कई नए विकल्प उपलब्ध कराए जाने के संकेत के रूप में देखी जा रही है यह हफ्ता शेयर बाजार के…
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इस हफ्ते दो नए IPO खोले जाने और सात कंपनियों की लिस्टिंग होने की तैयारी बाजार में निवेशकों के लिए कई नए विकल्प उपलब्ध कराए जाने के संकेत के रूप में देखी जा रही है

यह हफ्ता शेयर बाजार के लिए थोड़ा शांत लेकिन दिलचस्प रहने वाला है। प्राइमरी मार्केट में इस बार सिर्फ दो नए IPO खुलेंगे, लेकिन दोनों अपने आकार और सेक्टर की वजह से निवेशकों का ध्यान खींच सकते हैं। मेनबोर्ड पर एक्सेलसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज 500 करोड़ रुपये के इश्यू के साथ दस्तक देगी, जबकि SME में गैलर्ड स्टील 37.50 करोड़ रुपये जुटाने की तैयारी में है। दोनों IPO 19 नवंबर को खुलेंगे और 21 नवंबर तक सब्सक्रिप्शन के लिए उपलब्ध रहेंगे।

इसके साथ ही यह हफ्ता लिस्टिंग्स के मामले में काफी व्यस्त रहने वाला है। कुल सात नए IPO बाजार में उतारेंगे और BSE-NSE पर निवेशकों की धड़कनें तेज करेंगे। फिजिक्सवाला, MV फोटोवोल्टेइक, टेनेको क्लीन एयर, फुजियामा पावर सिस्टम्स और कैपिलरी टेक्नोलॉजीज जैसी कंपनियां मेनबोर्ड पर दिखाई देंगी, जबकि वर्कमेट्स कोर2क्लाउड और महामाया लाइफसाइंसेज SME प्लेटफॉर्म पर लिस्ट होंगी। इतने सारे नए विकल्पों के साथ निवेशकों के सामने सही चुनाव करने की चुनौती भी रहेगी।

इस हफ्ते खुलेंगे दो IPO

एक्सेलसॉफ्ट टेक्नोलॉजीज IPO

ये IPO 19 नवंबर को सब्सक्रिप्शन के लिए खुलेगा और 21 नवंबर को बंद होगा। ये बुक बिल्ट ऑफर है, कुल 500 करोड़ रुपये का। इसमें 1.50 करोड़ शेयरों का फ्रेश इश्यू है जो 180 करोड़ रुपये का, और 2.67 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल है जो 320 करोड़ रुपये का है।

प्राइस बैंड 114 से 120 रुपये प्रति शेयर है। आनंद राठी एडवाइजर्स लिमिटेड बुक रनिंग लीड मैनेजर है, और एमयूएफजी इंटाइम इंडिया प्राइवेट लिमिटेड रजिस्ट्रार है।

गैलर्ड स्टील का IPO

ये IPO भी 19 नवंबर को खुलेगा और 21 नवंबर को बंद होगा। ये SME IPO है, बुक बिल्ट इश्यू 37.50 करोड़ रुपये का। पूरी तरह फ्रेश इश्यू है, 0.25 करोड़ शेयरों का ऑफर फॉर सेल 37.50 करोड़ रुपये का है।

प्राइस बैंड 142 से 150 रुपये प्रति शेयर है। सेरेन कैपिटल प्राइवेट लिमिटेड बुक रनिंग लीड मैनेजर है, और अंकित कंसल्टेंसी प्राइवेट लिमिटेड रजिस्ट्रार है।

नए कंपनियों की होगी लिस्टिंग

इस हफ्ते कई IPO की लिस्टिंग होगी:

  • फिजिक्सवाला IPO: BSE और NSE पर लिस्ट होगा, टेंटेटिव डेट 18 नवंबर।
  • एमवी फोटोवोल्टेइक IPO: BSE और NSE पर लिस्ट होगा, टेंटेटिव डेट 18 नवंबर।
  • टेनेको क्लीन एयर IPO: BSE और NSE पर लिस्ट होगा, टेंटेटिव डेट 19 नवंबर।
  • फुजियामा पावर सिस्टम्स IPO: BSE और NSE पर लिस्ट होगा, टेंटेटिव डेट 20 नवंबर।
  • कैपिलरी टेक्नोलॉजीज IPO: BSE और NSE पर लिस्ट होगा, टेंटेटिव डेट 21 नवंबर।
  • वर्कमेट्स कोर2क्लाउड IPO: SME IPO, BSE SME पर लिस्ट होगा, टेंटेटिव डेट 18 नवंबर।
  • महामाया लाइफसाइंसेज IPO: SME IPO, BSE SME पर लिस्ट होगा, टेंटेटिव डेट 18 नवंबर।

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