S&P Global का अनुमान: वित्त वर्ष 26 में असुरक्षित ऋणों में बढ़ेगा दबाव और फंसेगा अधिक धन

S&P Global ने यह भी कहा है कि वैश्विक अनिश्चितता के कारण बुनियादी ढांचे को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में कॉरपोरेट का पूंजीगत व्यय प्रभावित हो सकता है। एसऐंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने गुरुवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष 2026 के दौरान…

S&P Global का अनुमान: वित्त वर्ष 26 में असुरक्षित ऋणों में बढ़ेगा दबाव और फंसेगा अधिक धन

Last Updated: March 11, 2026 | 4:35 PM IST

हाइलाइट्स

  • S&P Global ने यह भी कहा है कि वैश्विक अनिश्चितता के कारण बुनियादी ढांचे को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में कॉरपोरेट का पूंजीगत व्यय प्रभावित हो सकता है। एसऐंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने गुरुवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष 2026 के दौरान…

S&P Global ने यह भी कहा है कि वैश्विक अनिश्चितता के कारण बुनियादी ढांचे को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में कॉरपोरेट का पूंजीगत व्यय प्रभावित हो सकता है।

एसऐंडपी ग्लोबल रेटिंग्स ने गुरुवार को कहा कि चालू वित्त वर्ष 2026 के दौरान भारत में असुरक्षित खुदरा ऋणों (व्यक्तिगत ऋण और माइक्रोफाइनैंस) में फंसा ऋण चरम पर होगा। इसमें यह भी  कहा गया है कि वैश्विक अनिश्चितता के कारण बुनियादी ढांचे को छोड़कर अन्य क्षेत्रों में कॉरपोरेट का पूंजीगत व्यय प्रभावित हो सकता है। इसकी वजह से भारत में ऋण वृद्धि प्रभावित हो सकती है। कॉरपोरेट उधारी ने गति पकड़ी है, लेकिन अनिश्चितता की स्थिति में  निजी पूंजीगत व्यय से जुड़ी वृद्धि में देरी हो सकती है।

रेटिंग एजेंसी ने चेतावनी दी है कि अमेरिका के साथ भारत का कम कारोबार होने की वजह से शुल्क का असर कम रहेगा, लेकिन भारत में माल भेजे जाने जैसे द्वितीयक असर स्टील और रसायन जैसे कुछ क्षेत्रों में हो सकता है।

एसऐंडपी ग्लोबल ने इस बात पर जोर दिया है कि तेजी से बढ़े कुछ खुदरा क्षेत्रों जैसे असुरक्षित व्यक्तिगत ऋण और माइक्रोफाइनैंस ऋण में गैर निष्पादित संपत्ति बढ़ सकती है। छोटे और मझोले उद्यमों (एसएमई) और वाणिज्यिक वाहन क्षेत्र पर दबाव के कारण शुरुआती चूक बढ़ी है।

इसमें कहा गया है, ‘हमारा मानना है कि सुरक्षित खुदरा ऋण में अंडरराइटिंग मानक बेहतर है और इस सेग्मेंट में चूक प्रबंधन योग्य रहेगी। इसी तरह से माइक्रोफाइनैंस में नियम सख्त किए जाने से संपत्ति की गुणवत्ता पर दबाव पड़ सकता है। भारत की बेहतरीन वृद्धि और ब्याज दर में गिरावट से भी बैंकों की संपत्ति की गुणवत्ता को समर्थन मिल रहा है।’

भारतीय रिजर्व बैंक ने असुरक्षित ऋणों में तेज वृद्धि को नियंत्रित करने के लिए 2023 में असुरक्षित ऋण पर जोखिम अधिभार बढ़ाया। बाद में बैंकिंग नियामक ने 2024 में मानदंडों में ढील दी। माइक्रोफाइनैंस उद्योग निकायों – एमएफआईएन और सा-धन ने भी कम आय वाले उधारकर्ताओं की संख्या सीमित करने के कदम उठाए हैं।

बैंक ऋण पर एसऐंडपी ग्लोबल ने कहा, ‘हम उम्मीद कर रहे हैं कि वित्त वर्ष 26 में ऋण वृद्धि 11-12 प्रतिशत पर स्थिर रहेगी, जो वित्त वर्ष 2025 के स्तर के समान है। इसमें खुदरा ऋण सबसे तेजी से बढ़ रहे हैं।’

 

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ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्य में बदलाव, 2030 तक 30 लाख टन उत्पादन का नया टारगेट

वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का…

Last Updated: November 22, 2025 | 7:45 AM IST

हाइलाइट्स

  • वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लेकर वैश्विक नीतिगत…
ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्य में बदलाव, 2030 तक 30 लाख टन उत्पादन का नया टारगेट
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वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लेकर वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण 50 लाख टन सालाना (एमएमटीपीए) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का भारत का लक्ष्य दो साल पीछे यानी 2032 तक खिसकने की संभावना है।

Green Hydrogen पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के सचिव संतोष सारंगी ने मंगलवार को कहा कि पहले के लक्ष्यों में संशोधन करके अब देश में 2030 तक 30 लाख टन सालाना  ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार ने जनवरी 2023 में नैशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) की शुरुआत की थी। इसका मकसद भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन व निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। इसके तहत 2030 तक सालाना 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था।

सारंगी ने कहा कि यूरोप में नीतिगत अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) द्वारा नेट जीरो फ्रेमवर्क (एनजेडएफ) को 1 साल तक के लिए टालने के फैसले के बाद भारत के लक्ष्य में बदलाव किया गया है।

उन्होंने कहा कि निर्यात पर केंद्रित भारतीय कंपनियां ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन लक्ष्यों को फिर से समायोजित कर सकती हैं, जबकि अन्य घरेलू कंपनियों जल्द ही परियोजनाएं शुरू कर सकती हैं।

सारंगी ने कहा, ‘ग्रीनको, एक्मे, सेंबकॉर्प जैसी कंपनियां सक्रिय रूप से साझेदार तलाश रही हैं और वे अपेक्षाकृत सफल रही हैं।’