अमेरिका के साथ टोटलाइजेशन समझौता किए जाने का प्रस्ताव भारत द्वारा पेश किया गया है जिससे भारतीय श्रमिकों पर सामाजिक सुरक्षा के दोहरे कराधान से राहत मिल सकती है
भारत ने ब्रिटेन की तर्ज पर अमेरिका के साथ टोटलाइजेशन समझौता करने का प्रस्ताव पेश किया है। भारत ने इस साल की शुरुआत में ब्रिटेन से ‘डबल कंट्रीब्यूशन कन्वेंशन (डीसीसी)’ समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। टोटलाइजेशन समझौता होने पर अमेरिका में काम करने वाले हजारों भारतीय श्रमिकों को फायदा हो सकता है। इससे कुशल व अकुशल श्रमिकों की प्रतिस्पर्धात्मकता में सुधार होने से लागत में सुधार आएगा। दरअसल, टोटलाइजेशन समझौता एक दूसरे के देश में जाकर काम करने वाले श्रमिकों के लिए सामाजिक सुरक्षा के दोहरे कराधान को रोकता है।
यह प्रस्ताव अमेरिका के साथ व्यापार समझौते के दौरान किया गया है। अभी इस प्रस्ताव पर चर्चा जारी है। अधिकारी ने बताया, ‘भारत और ब्रिटेन ने इस साल की शुरुआत में टोटलाइजेशन समझौते पर हस्ताक्षर किए हैं। यह भारतीय श्रमिकों को तीन साल की अवधि के लिए पूरी तरह से अपने देश में सामाजिक सुरक्षा योगदान का भुगतान करने की अनुमति देता है। हमें अमेरिका के साथ भी इसी तरह के टोटलाइजेशन समझौते की उम्मीद है। हमने जारी बातचीत में प्रस्ताव पेश किया है। इस मामले पर भी चर्चा हुई है।’
टोटलाइजेशन समझौता दोनों हस्ताक्षरकर्ताओं की सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों के बीच समन्वय करता है। यह तय करता है कि यदि श्रमिक पहले से ही अपने ही देश की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में योगदान कर रहे हैं तो इन देशों के नागरिक किसी अन्य देश की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में भुगतान करने से बचें। इसका उद्देश्य दोहरे कराधान से बचना है ताकि श्रमिकों को एक ही काम के लिए दोनों देशों की सामाजिक सुरक्षा प्रणालियों में भुगतान न करना पड़े। भारत लंबे समय से अमेरिकी अधिकारियों को इस तरह के समझौते पर हस्ताक्षर करने के लिए राजी करने की कोशिश कर रहा है। इससे भले ही अमेरिका में काम करते समय भारतीयों को उस देश की सामाजिक सुरक्षआ के लाभ प्राप्त करने की अनुमति नहीं हो लेकिन अमेरिका की सामाजिक सुरक्षा प्रणाली में दिए गए योगदान को भारत में वापस लाने में मदद मिल सकती है।
