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निर्यातकों के 800 करोड़ रुपये बकाया जल्द जारी करेगी सरकार

आईईएस एक ब्याज सहायता योजना है। इसके तहत निर्यातकों को खेप भेजे जाने से पहले व बाद में दिए जाने वाले रुपया निर्यात ऋण पर बैंक की वसूली जाने वाली ब्याज दरों में छूट दी जाती है। सरकार शीघ्र ही…

Last Updated: March 11, 2026 | 4:35 PM

हाइलाइट्स

आईईएस एक ब्याज सहायता योजना है। इसके तहत निर्यातकों को खेप भेजे जाने से पहले व बाद में दिए जाने वाले रुपया निर्यात ऋण पर बैंक की वसूली जाने वाली ब्याज दरों में छूट दी जाती है।

सरकार शीघ्र ही निर्यातकों का बकाया 800 करोड़ रुपये जारी करने के लिए कदम उठाएगी। एक अधिकारी ने बताया कि सरकार हाल में मंजूर निर्यात संवर्द्धन मिशन (ईपीए) के तहत पुनर्गठित ब्याज इक्वलाइजेशन स्कीम (आईईएस) को जारी कर रकम अदा करने की तैयारी कर रही है।

इससे निर्यातकों विशेषतौर पर एमएसएमई को राहत मिलेगी। निर्यातक वैश्विक चुनौतियों से दो चार हो रहे हैं। वे भारतीय उत्पादों पर अमेरिका के लगाए गए भारी भरकम शुल्क का भी सामना करने रहे हैं।

अधिकारी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि यह रकम 31 दिसंबर, 2024 की बकाया राशि है। सरकार आईईएस के तहत निर्यातकों के बकाए का भुगतान करने के अलावा मार्केट ऐक्सेस इनिशिएटिव (एमएआई) योजना की बकाया करीब 300 करोड़ रुपये की राशि भी जारी करेगी। एमएआई निर्यात संवर्द्धन योजना है और यह देश व उत्पाद केंद्रित है।

आईईएस एक ब्याज सहायता योजना है। इसके तहत निर्यातकों को खेप भेजे जाने से पहले व बाद में दिए जाने वाले रुपया निर्यात ऋण पर बैंक की वसूली जाने वाली ब्याज दरों में छूट दी जाती है। इसके बाद सरकार ऋणदाताओं को मुआवजा देती है। इससे निर्यातकों को अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धी बनने में मदद मिलती है।

यह योजना वर्ष 2025 में पांच वर्ष के लिए निर्यातकों की समस्याओं को दूर करने के लिए शुरू हुई थी। यह योजना विशेष तौर पर श्रम सघन क्षेत्रों और एमएसएमई के लिए दी गई थी। इसके बाद इस योजना का समय समय बढ़ाया गया है। अभी यह योजना लागू नहीं है। इसका कारण यह है कि इसका सरकार ने 31 दिसंबर, 2024 के बाद विस्तार नहीं किया था।

First Published - November 22, 2025 | 6:58 AM IST
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India-US LPG Deal: भारत की खाड़ी देशों पर घटेगी निर्भरता, घर-घर पहुंचेगी किफायती गैस

भारत ने अमेरिका से 2.2 मिलियन टन एलपीजी का ऐतिहासिक समझौता कर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया। India-US LPG Deal: भारत ने अमेरिका के साथ 2.2 मिलियन…

aarti gosavi

Last Updated: March 11, 2026 | 4:35 PM IST

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हाइलाइट्स

  • भारत ने अमेरिका से 2.2 मिलियन टन एलपीजी का ऐतिहासिक समझौता कर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया। India-US LPG Deal: भारत ने अमेरिका के साथ 2.2 मिलियन टन (mt) एलपीजी का टर्म डील किया है। यह कदम…
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India-LPG-deal

भारत ने अमेरिका से 2.2 मिलियन टन एलपीजी का ऐतिहासिक समझौता कर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

India-US LPG Deal: भारत ने अमेरिका के साथ 2.2 मिलियन टन (mt) एलपीजी का टर्म डील किया है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में उत्पन्न होने वाली अनिश्चितताओं के बीच भारत की सुरक्षा को मजबूत करेगा। इस समझौते के अनुसार, 2026 से भारत की सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) देश में कुल एलपीजी का 10 प्रतिशत अमेरिका से आयात करेंगी।

अब तक भारत का अमेरिका के साथ एलपीजी आयात में कोई टर्म डील नहीं था। देश की घरेलू एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात पर निर्भर है और वर्तमान में 90 प्रतिशत एलपीजी आयात पश्चिम एशियाई देशों जैसे संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब और कुवैत से होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका से एलपीजी आयात करने का निर्णय भारत के लिए स्रोत विविधता बढ़ाने में मदद करेगा और पश्चिम एशियाई देशों पर निर्भरता कम करेगा। इक्रा के सीनियर उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि अमेरिका प्राकृतिक गैस तरल पदार्थों का बड़ा उत्पादक है। अमेरिका से एलपीजी आयात करना चल रही व्यापार वार्ता के अनुरूप है और यह वैश्विक राजनीतिक तनाव के समय भारत के लिए फायदेमंद होगा।

इस साल की शुरुआत में ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष के कारण हॉर्मुज की खाड़ी बंद होने का खतरा पैदा हुआ था, जिससे भारत की एलपीजी सप्लाई पर असर पड़ सकता था।

भारत के तेल मंत्री हर्षदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह करार देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और लाखों घरों को किफायती और साफ-सुथरी खाना पकाने वाली गैस उपलब्ध कराने में मदद करेगा। हालांकि उन्होंने इस करार की कीमत का खुलासा नहीं किया। मंत्री ने बताया कि इस करार में अमेरिकी एलपीजी खरीद की कीमत का आधार माउंट बेल्व्यू, अमेरिका का एक प्रमुख एलपीजी मूल्य निर्धारण केंद्र, होगा।

मरीन इंटेलिजेंस फर्म Kpler की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत ने अब तक 36% एलपीजी यूएई से, 21% कतर से, 16% कुवैत से और 6% अमेरिका से आयात किया है। पिछले तीन सालों में अमेरिका का हिस्सा केवल 0.5% से 2% तक रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका से आने वाली एलपीजी भारत के लिए महंगी होगी क्योंकि समुद्री रास्ता लंबा है। Kpler के सीनियर एनालिस्ट सियारन टायलर के अनुसार, “भारतीय कंपनियों को अमेरिका से आने वाली एलपीजी के लिए मध्य पूर्व से आने वाले मुकाबले ज्यादा कीमत चुकानी होगी। अमेरिका से जहाज भारत पहुंचने में लगभग 45 दिन लगते हैं, जबकि मध्य पूर्व से सिर्फ 7-8 दिन।”

हाल ही में LPG (तरल पेट्रोलियम गैस) की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट और अमेरिका के साथ लागत पर चल रहे समझौतों से भारत की कंपनियों को महंगे फ्रेट का असर कम करने में मदद मिल सकती है।

ICRA के विशेषज्ञ वशिष्ठ के अनुसार, “अप्रैल से अंतरराष्ट्रीय LPG की कीमतें कम हुई हैं। सऊदी CP (कॉन्ट्रैक्ट प्राइस) में भारी कमी आई है और कच्चे तेल की कीमतें $60-$65 प्रति बैरल के आसपास स्थिर रहने की संभावना है। इससे भारत अमेरिका से LPG आयात बढ़ा सकता है। फ्रेट लागत जरूर अधिक होगी, लेकिन अमेरिका भारत को बेहतर कीमत देने का प्रयास कर सकता है ताकि असर कम हो।”

LPG, जो कि ब्यूटेन और प्रोपेन का मिश्रण है, की कीमतें कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों से जुड़ी होती हैं, क्योंकि इसे इन ईंधनों के रिफाइनिंग के दौरान बनाया जाता है। अक्टूबर में सऊदी अरामको ने ब्यूटेन और प्रोपेन के लिए बेंचमार्क कॉन्ट्रैक्ट प्राइस अगस्त 2023 के बाद सबसे कम $475 और $495 प्रति टन तय किए।

ऊर्जा क्षेत्र: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की अहम भूमिका

जैसे ही भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत कर रहे हैं, ऊर्जा क्षेत्र इस समझौते को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि दोनों देश “काफी करीब” हैं एक उचित व्यापार समझौते पर पहुंचने के लिए और अमेरिका भारत पर लगाए गए कुछ टैरिफ पर पुनर्विचार कर सकता है।

अगस्त में, अमेरिका ने भारत पर रूस से ऊर्जा खरीदने के लिए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया था, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो गया।

इसके अलावा, भारत ने 2025 में अमेरिका से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाई है। अक्टूबर में भारतीय रिफाइनर ने मार्च 2021 के बाद सबसे अधिक मात्रा में अमेरिका से कच्चा तेल आयात किया। ट्रंप ने भारत से व्यापार घाटा कम करने के लिए यह कदम उठाने के लिए कहा था।

 

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