7 फीसदी से अधिक वृद्धि के लिए निवेश दर बढ़ाना जरुरी

ईएसी के चेयरमैन ने बताया, ‘भारत के लिए गायब मध्य एक सवाल है। भूमि व श्रम के मार्केट सुधारों की जरूरत है और इसमें राज्य को नेतृत्वकारी भूमिका निभानी है। भारत को 7 प्रतिशत और उससे अधिक की वृद्धि दर…

7 फीसदी से अधिक वृद्धि के लिए निवेश दर बढ़ाना जरुरी

Last Updated: March 11, 2026 | 4:35 PM IST

हाइलाइट्स

  • ईएसी के चेयरमैन ने बताया, ‘भारत के लिए गायब मध्य एक सवाल है। भूमि व श्रम के मार्केट सुधारों की जरूरत है और इसमें राज्य को नेतृत्वकारी भूमिका निभानी है। भारत को 7 प्रतिशत और उससे अधिक की वृद्धि दर…

ईएसी के चेयरमैन ने बताया, ‘भारत के लिए गायब मध्य एक सवाल है। भूमि व श्रम के मार्केट सुधारों की जरूरत है और इसमें राज्य को नेतृत्वकारी भूमिका निभानी है।

भारत को 7 प्रतिशत और उससे अधिक की वृद्धि दर को हासिल करने के लिए निवेश दर को बढ़ाकर 34-35 प्रतिशत करने की जरूरत है जबकि अभी यह दर 31-32 प्रतिशत है। ऐसे में निजी क्षेत्र की भूमिका अहम है। प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (ईएसी) के चेयरमैन महेंद्र देव ने दिल्ली स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स में बुधवार को यह भी कहा कि अनिश्चितताओं के बीच विशेषतौर पर विदेशी निवेश प्रभावित होने से निवेश को धन मुहैया कराने के लिए बचत बढ़ाने की जरूरत है।

देव ने भारत को 2047 तक विकसित राष्ट्र बनाने के लिए श्रम प्रधान, उच्च विनिर्माण विकास की ओर अग्रसर होने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने भारत के विनिर्माण क्षेत्र में ‘गायब मध्य’ (मिसिंग मिडिल) को भी उजागर किया। भारत में छोटी या बहुत बड़ी फर्म उत्पादकता में बाधा पैदा कर रही हैं। ईएसी के चेयरमैन ने बताया, ‘भारत के लिए गायब मध्य एक सवाल है। भूमि व श्रम के मार्केट सुधारों की जरूरत है और इसमें राज्य को नेतृत्वकारी भूमिका निभानी है। एमएसएमई के सामने आने वाले मुद्दों पर नियमन हटाने वाली समिति भी विचार कर रही है।’

उन्होंने कहा कि विनिर्माण और सेवा क्षेत्र एक दूसरे के पूरक थे और यह ग्राहक या उद्योग (फॉरवर्ड) और आपूर्ति (बैकवर्ड) समन्वय के लिए जरूरी है। उन्होंने बताया, ‘सेवा क्षेत्र को भी बढ़ते हुए विनिर्माण क्षेत्र की जरूरत होती है।’

देव ने भारत के वृद्धि के लिए निर्यात के महत्त्व को भी उजागर किया। उन्होंने कहा, ‘कोई भी उभरती मार्केट मजबूत निर्यात वृद्धि के बिना 7 से 8 प्रतिशत की दर से विकास नहीं कर सकती है।’ उन्होंने कहा कि जीडीपी में निर्यात की हिस्सेदारी केवल 20 प्रतिशत है और इसका अन्य क्षेत्रों पर कई गुना प्रभाव पड़ सकता है।

उन्होंने कहा कि कई लोगों ने भारत को ट्रांस-पैसिफिक पार्टनरशिप के लिए समग्र व प्रगतिशील समझौते या क्षेत्रीय व्यापक आर्थिक साझेदारी जैसे क्षेत्रीय समूहों में शामिल होने का सुझाव दिया। इसलिए सरकार को इसके फायदे और नुकसान पर विचार करना होगा। उन्होंने कहा, ‘मेरा मानना है कि नियम-आधारित विश्व व्यापार संगठन संरक्षणवाद से हमेशा बेहतर होता है… अंतरराष्ट्रीय व्यापार में कमी के बावजूद भारत के लिए व्यापारिक वस्तुओं के व्यापार में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने के कई अवसर हैं।’

देव ने वैश्विक चुनौतियों के मामले में कहा कि विकासशील और विकसित देशों में औद्योगिक नीति का पुनरुत्थान आर्थिक रणनीति में महत्त्वपूर्ण बदलाव रहा है। देव ने बताया कि 1960 की 101 मध्यम आय अर्थव्यवस्थाओं में से केवल 23 ही उच्च आय के स्तर को हासिल कर पाईं। भारत को मध्य आय के चक्रव्यूह से बचने की जरूरत है।

देव ने कहा, ‘जीडीपी वृद्धि महत्त्वपूर्ण है लेकिन यह जरूरी है कि इसे हरेक साझा करे – समावेशिता और चिरस्थायित्व जरूरी है। वृद्धि के लिए रोजगार महत्त्वपूर्ण है।’उन्होंने बताया कि विकसित देश अन्य विकसित राज्यों से मानव विकास में अंतर को पाट रहे हैं लेकिन अभी भी प्रति व्यक्ति आय में असमानता कायम है।

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India-US LPG Deal: भारत की खाड़ी देशों पर घटेगी निर्भरता, घर-घर पहुंचेगी किफायती गैस

भारत ने अमेरिका से 2.2 मिलियन टन एलपीजी का ऐतिहासिक समझौता कर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया। India-US LPG Deal: भारत ने अमेरिका के साथ 2.2 मिलियन…

Last Updated: November 22, 2025 | 7:01 AM IST

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  • भारत ने अमेरिका से 2.2 मिलियन टन एलपीजी का ऐतिहासिक समझौता कर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया। India-US LPG Deal: भारत ने अमेरिका के साथ 2.2 मिलियन टन (mt) एलपीजी का टर्म डील किया है। यह कदम…
India-US LPG Deal: भारत की खाड़ी देशों पर घटेगी निर्भरता, घर-घर पहुंचेगी किफायती गैस
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भारत ने अमेरिका से 2.2 मिलियन टन एलपीजी का ऐतिहासिक समझौता कर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

India-US LPG Deal: भारत ने अमेरिका के साथ 2.2 मिलियन टन (mt) एलपीजी का टर्म डील किया है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में उत्पन्न होने वाली अनिश्चितताओं के बीच भारत की सुरक्षा को मजबूत करेगा। इस समझौते के अनुसार, 2026 से भारत की सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) देश में कुल एलपीजी का 10 प्रतिशत अमेरिका से आयात करेंगी।

अब तक भारत का अमेरिका के साथ एलपीजी आयात में कोई टर्म डील नहीं था। देश की घरेलू एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात पर निर्भर है और वर्तमान में 90 प्रतिशत एलपीजी आयात पश्चिम एशियाई देशों जैसे संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब और कुवैत से होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका से एलपीजी आयात करने का निर्णय भारत के लिए स्रोत विविधता बढ़ाने में मदद करेगा और पश्चिम एशियाई देशों पर निर्भरता कम करेगा। इक्रा के सीनियर उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि अमेरिका प्राकृतिक गैस तरल पदार्थों का बड़ा उत्पादक है। अमेरिका से एलपीजी आयात करना चल रही व्यापार वार्ता के अनुरूप है और यह वैश्विक राजनीतिक तनाव के समय भारत के लिए फायदेमंद होगा।

इस साल की शुरुआत में ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष के कारण हॉर्मुज की खाड़ी बंद होने का खतरा पैदा हुआ था, जिससे भारत की एलपीजी सप्लाई पर असर पड़ सकता था।

भारत के तेल मंत्री हर्षदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह करार देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और लाखों घरों को किफायती और साफ-सुथरी खाना पकाने वाली गैस उपलब्ध कराने में मदद करेगा। हालांकि उन्होंने इस करार की कीमत का खुलासा नहीं किया। मंत्री ने बताया कि इस करार में अमेरिकी एलपीजी खरीद की कीमत का आधार माउंट बेल्व्यू, अमेरिका का एक प्रमुख एलपीजी मूल्य निर्धारण केंद्र, होगा।

मरीन इंटेलिजेंस फर्म Kpler की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत ने अब तक 36% एलपीजी यूएई से, 21% कतर से, 16% कुवैत से और 6% अमेरिका से आयात किया है। पिछले तीन सालों में अमेरिका का हिस्सा केवल 0.5% से 2% तक रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका से आने वाली एलपीजी भारत के लिए महंगी होगी क्योंकि समुद्री रास्ता लंबा है। Kpler के सीनियर एनालिस्ट सियारन टायलर के अनुसार, “भारतीय कंपनियों को अमेरिका से आने वाली एलपीजी के लिए मध्य पूर्व से आने वाले मुकाबले ज्यादा कीमत चुकानी होगी। अमेरिका से जहाज भारत पहुंचने में लगभग 45 दिन लगते हैं, जबकि मध्य पूर्व से सिर्फ 7-8 दिन।”

हाल ही में LPG (तरल पेट्रोलियम गैस) की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट और अमेरिका के साथ लागत पर चल रहे समझौतों से भारत की कंपनियों को महंगे फ्रेट का असर कम करने में मदद मिल सकती है।

ICRA के विशेषज्ञ वशिष्ठ के अनुसार, “अप्रैल से अंतरराष्ट्रीय LPG की कीमतें कम हुई हैं। सऊदी CP (कॉन्ट्रैक्ट प्राइस) में भारी कमी आई है और कच्चे तेल की कीमतें $60-$65 प्रति बैरल के आसपास स्थिर रहने की संभावना है। इससे भारत अमेरिका से LPG आयात बढ़ा सकता है। फ्रेट लागत जरूर अधिक होगी, लेकिन अमेरिका भारत को बेहतर कीमत देने का प्रयास कर सकता है ताकि असर कम हो।”

LPG, जो कि ब्यूटेन और प्रोपेन का मिश्रण है, की कीमतें कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों से जुड़ी होती हैं, क्योंकि इसे इन ईंधनों के रिफाइनिंग के दौरान बनाया जाता है। अक्टूबर में सऊदी अरामको ने ब्यूटेन और प्रोपेन के लिए बेंचमार्क कॉन्ट्रैक्ट प्राइस अगस्त 2023 के बाद सबसे कम $475 और $495 प्रति टन तय किए।

ऊर्जा क्षेत्र: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की अहम भूमिका

जैसे ही भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत कर रहे हैं, ऊर्जा क्षेत्र इस समझौते को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि दोनों देश “काफी करीब” हैं एक उचित व्यापार समझौते पर पहुंचने के लिए और अमेरिका भारत पर लगाए गए कुछ टैरिफ पर पुनर्विचार कर सकता है।

अगस्त में, अमेरिका ने भारत पर रूस से ऊर्जा खरीदने के लिए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया था, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो गया।

इसके अलावा, भारत ने 2025 में अमेरिका से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाई है। अक्टूबर में भारतीय रिफाइनर ने मार्च 2021 के बाद सबसे अधिक मात्रा में अमेरिका से कच्चा तेल आयात किया। ट्रंप ने भारत से व्यापार घाटा कम करने के लिए यह कदम उठाने के लिए कहा था।