रेल मंत्रालय का बड़ा कदम: NMP 2.0 में मुद्रीकरण से 2.5 लाख करोड़ जुटाएगा रेलवे

मुद्रीकरण की प्रक्रिया में सरकार पीपीपी के जरिये निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनि​श्चित करते हुए आय अर्जित करने वाली परिसंप​त्तियों का लाभ उठाती है रेल मंत्रालय निजी निवेश के अपने सबसे बड़े अ​भियान के तहत राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के दूसरे…

रेल मंत्रालय का बड़ा कदम: NMP 2.0 में मुद्रीकरण से 2.5 लाख करोड़ जुटाएगा रेलवे

Last Updated: March 11, 2026 | 4:35 PM IST

हाइलाइट्स

  • मुद्रीकरण की प्रक्रिया में सरकार पीपीपी के जरिये निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनि​श्चित करते हुए आय अर्जित करने वाली परिसंप​त्तियों का लाभ उठाती है रेल मंत्रालय निजी निवेश के अपने सबसे बड़े अ​भियान के तहत राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के दूसरे…

मुद्रीकरण की प्रक्रिया में सरकार पीपीपी के जरिये निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनि​श्चित करते हुए आय अर्जित करने वाली परिसंप​त्तियों का लाभ उठाती है

रेल मंत्रालय निजी निवेश के अपने सबसे बड़े अ​भियान के तहत राष्ट्रीय मुद्रीकरण पाइपलाइन के दूसरे चरण (एनएमपी 2.0) में अगले 5 साल के दौरान 2.5 लाख करोड़ रुपये की परिसंपत्तियों को भुनाने की तैयारी कर रहा है। बिज़नेस स्टैंडर्ड को ऐसी जानकारी मिली है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, 10 लाख करोड़ रुपये की दूसरी मुद्रीकरण पाइपलाइन तैयारी के चरण में है। इसके लिए वि​भिन्न मंत्रालयों ने संभावित परिसंप​त्तियों की शुरुआती सूची तैयार कर ली है और इसके जल्द ही जारी होने की उम्मीद है। दूसरी मुद्रीकरण पाइपलाइन 2029-30 तक केंद्रीय मुद्रीकरण रणनीति की बुनियाद होगी जिसकी घोषणा वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने अपने बजट भाषण में की थी।

रेल मंत्रालय के एक प्रवक्ता ने कहा कि रेलवे सार्वजनिक-निजी भागीदारी (पीपीपी) मॉडल और बहु-परिसंप​​त्ति दृष्टिकोण के जरिये इस लक्ष्य को हासिल करने की कोशिश करेगा। मुद्रीकरण की प्रक्रिया में सरकार पीपीपी के जरिये निजी क्षेत्र की भागीदारी सुनि​श्चित करते हुए आय अर्जित करने वाली परिसंप​त्तियों का लाभ उठाती है। ऐसा आम तौर पर राजस्व साझेदारी मॉडल के जरिये किया जाता है।

प्रवक्ता ने कहा, ‘वि​भिन्न परिसंप​त्तियों वाले इस दृष्टिकोण का उपयोग करते हुए मंत्रालय गति शक्ति कार्गो टर्मिनल का मुद्रीकरण करने और नई मालगाड़ियां निजी निवेश के जरिये लाने की योजना बना रहा है। उम्मीद है कि स्टेशन पुनर्विकास और स्टेशनों के आसपास पीपीपी आधारित कम​र्शियल डेवलपमेंट से रकम प्राप्त होगी। फिलहाल विजयवाड़ा स्टेशन के लिए ऐसा किया जा रहा है।’

रेलवे पहली मुद्रीकरण पाइपलाइन के दौरान निजी संस्थाओं को परिचालन सौंपने से हिचकिचा रहा था। मगर इस साल की शुरुआत में शीर्ष अफसरशाहों की एक बैठक में मुद्रीकरण के प्रयास तेज करने के लिए कहा गया था।

मामले की जानकारी रखने वाले अधिकारियों के अनुसार, रेलवे को शुरू में वित्त वर्ष 2030 तक 1.7 लाख करोड़ रुपये के मुद्रीकरण का लक्ष्य दिया गया था। मगर रेलवे ने पुष्टि की है कि अब इसे बढ़ाकर 2.5 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। इस प्रकार नया लक्ष्य करीब 50 फसदी अधिक हो गया है।

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मंत्रालय वा​णि​ज्यिक एवं रिहायशी परियोजनाओं के लिए उच्च मूल्य वाले भूखंडों का मुद्रीकरण भी करेगा। ऐसा फिलहाल कोलकाता के साल्ट गोला, दिल्ली के सेवा नगर-लोधी कॉलोनी आदि जगहों पर किया जा रहा है। प्रवक्ता ने कहा, ‘रेल मंत्रालय इस मुद्रीकरण लक्ष्य को हासिल करने के लिए कई मोर्चों पर काम कर रहा है।’

साल 2021 में जारी पहले एनएमपी के अनुसार, रेल मंत्रालय के लिए वित्त वर्ष 2025 तक का लक्ष्य 1.52 लाख करोड़ रुपये था। मगर अधिकारियों ने बताया कि इसे संशोधित कर 1 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया था।

शुरुआत में केंद्र के थिंक टैंक को उम्मीद थी कि मंत्रालय को आधी आय रेलवे स्टेशनों के मुद्रीकरण से हो जाएगी। इसमें पुनर्विकास परियोजनाओं को पीपीपी मोड में लाने की बात कही गई थी।

रेलवे को स्टेशन मुद्रीकरण परियोजनाओं में भी बाजार की जबरदस्त दिलचस्पी दिखी थी। छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस और नई दिल्ली रेलवे स्टेशन जैसी बड़ी परियोजनाओं को हासिल करने की दौड़ में अदाणी रेलवेज, जीएमआर हाइवेज, गोदरेज प्रॉपर्टीज और ओबेरॉय रियल्टी जैसी प्रमुख कंपनियां शामिल थीं।

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रेलवे विशेष प्रयोजन कंपनी (एसपीवी) के बंद होने के कारण निविदा रद्द कर दिए गए थे। केंद्रीय मंत्रिमंडल ने सितंबर 2022 में 3 मेगा स्टेशनों के पुनर्विकास के लिए 10,000 करोड़ रुपये की योजना को मंजूरी दी थी।

अपनी पहचान जाहिर न करने की शर्त पर दो अ​धिकारियों ने बताया कि 1.24 लाख करोड़ रुपये के पूर्वी एवं पश्चिमी डेडिकेटेड फ्रेट कॉरिडोर (डीएफसी) के मुद्रीकरण के प्रस्ताव पर भी चर्चा शुरू हुई थी। मगर रेल मंत्रालय ने एक आधिकारिक जवाब में कहा कि फिलहाल ऐसा कोई प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।

नीति आयोग ने फ्रेट कॉरिडोर प्रस्ताव की पुष्टि या खंडन नहीं किया। आयोग के प्रवक्ता ने पूछे गए सवालों के जवाब में कहा, ‘परिसंप​त्ति मुद्रीकरण योजना 2.0 को अंतर-मंत्रालयी परामर्श प्रक्रिया के जरिये अंतिम रूप दिए जाने के बाद ही इससे संबंधित विवरण सार्वजनिक किए जाएंगे।’

विशेषज्ञों का मानना है कि किसी परियोजना की परिसंप​त्ति मुद्रीकरण कई कारकों पर निर्भर करती है। मगर इसमें दो कारकों की अ​हम भूमिका होती है जिनमें निजी क्षेत्र की दिलचस्पी और मुद्रीकरण के लिए सरकार की अपेक्षा शामिल हैं।

डेलॉयट इंडिया के पार्टनर कुशल कुमार सिंह ने कहा, ‘शुरुआती आकलन से संकेत मिलता है कि कॉरिडोर के संचालन में निजी क्षेत्र की दिलचस्पी है। मगर अपे​क्षित परिणाम हासिल करने के लिए उचित जोखिम-आवंटन फ्रेमवर्क की पहचान करना और मुद्रीकरण ढांचे को अंतिम रूप देना महत्त्वपूर्ण है।’

 

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India-US LPG Deal: भारत की खाड़ी देशों पर घटेगी निर्भरता, घर-घर पहुंचेगी किफायती गैस

भारत ने अमेरिका से 2.2 मिलियन टन एलपीजी का ऐतिहासिक समझौता कर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया। India-US LPG Deal: भारत ने अमेरिका के साथ 2.2 मिलियन…

Last Updated: November 22, 2025 | 7:01 AM IST

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  • भारत ने अमेरिका से 2.2 मिलियन टन एलपीजी का ऐतिहासिक समझौता कर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया। India-US LPG Deal: भारत ने अमेरिका के साथ 2.2 मिलियन टन (mt) एलपीजी का टर्म डील किया है। यह कदम…
India-US LPG Deal: भारत की खाड़ी देशों पर घटेगी निर्भरता, घर-घर पहुंचेगी किफायती गैस
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भारत ने अमेरिका से 2.2 मिलियन टन एलपीजी का ऐतिहासिक समझौता कर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

India-US LPG Deal: भारत ने अमेरिका के साथ 2.2 मिलियन टन (mt) एलपीजी का टर्म डील किया है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में उत्पन्न होने वाली अनिश्चितताओं के बीच भारत की सुरक्षा को मजबूत करेगा। इस समझौते के अनुसार, 2026 से भारत की सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) देश में कुल एलपीजी का 10 प्रतिशत अमेरिका से आयात करेंगी।

अब तक भारत का अमेरिका के साथ एलपीजी आयात में कोई टर्म डील नहीं था। देश की घरेलू एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात पर निर्भर है और वर्तमान में 90 प्रतिशत एलपीजी आयात पश्चिम एशियाई देशों जैसे संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब और कुवैत से होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका से एलपीजी आयात करने का निर्णय भारत के लिए स्रोत विविधता बढ़ाने में मदद करेगा और पश्चिम एशियाई देशों पर निर्भरता कम करेगा। इक्रा के सीनियर उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि अमेरिका प्राकृतिक गैस तरल पदार्थों का बड़ा उत्पादक है। अमेरिका से एलपीजी आयात करना चल रही व्यापार वार्ता के अनुरूप है और यह वैश्विक राजनीतिक तनाव के समय भारत के लिए फायदेमंद होगा।

इस साल की शुरुआत में ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष के कारण हॉर्मुज की खाड़ी बंद होने का खतरा पैदा हुआ था, जिससे भारत की एलपीजी सप्लाई पर असर पड़ सकता था।

भारत के तेल मंत्री हर्षदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह करार देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और लाखों घरों को किफायती और साफ-सुथरी खाना पकाने वाली गैस उपलब्ध कराने में मदद करेगा। हालांकि उन्होंने इस करार की कीमत का खुलासा नहीं किया। मंत्री ने बताया कि इस करार में अमेरिकी एलपीजी खरीद की कीमत का आधार माउंट बेल्व्यू, अमेरिका का एक प्रमुख एलपीजी मूल्य निर्धारण केंद्र, होगा।

मरीन इंटेलिजेंस फर्म Kpler की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत ने अब तक 36% एलपीजी यूएई से, 21% कतर से, 16% कुवैत से और 6% अमेरिका से आयात किया है। पिछले तीन सालों में अमेरिका का हिस्सा केवल 0.5% से 2% तक रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका से आने वाली एलपीजी भारत के लिए महंगी होगी क्योंकि समुद्री रास्ता लंबा है। Kpler के सीनियर एनालिस्ट सियारन टायलर के अनुसार, “भारतीय कंपनियों को अमेरिका से आने वाली एलपीजी के लिए मध्य पूर्व से आने वाले मुकाबले ज्यादा कीमत चुकानी होगी। अमेरिका से जहाज भारत पहुंचने में लगभग 45 दिन लगते हैं, जबकि मध्य पूर्व से सिर्फ 7-8 दिन।”

हाल ही में LPG (तरल पेट्रोलियम गैस) की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट और अमेरिका के साथ लागत पर चल रहे समझौतों से भारत की कंपनियों को महंगे फ्रेट का असर कम करने में मदद मिल सकती है।

ICRA के विशेषज्ञ वशिष्ठ के अनुसार, “अप्रैल से अंतरराष्ट्रीय LPG की कीमतें कम हुई हैं। सऊदी CP (कॉन्ट्रैक्ट प्राइस) में भारी कमी आई है और कच्चे तेल की कीमतें $60-$65 प्रति बैरल के आसपास स्थिर रहने की संभावना है। इससे भारत अमेरिका से LPG आयात बढ़ा सकता है। फ्रेट लागत जरूर अधिक होगी, लेकिन अमेरिका भारत को बेहतर कीमत देने का प्रयास कर सकता है ताकि असर कम हो।”

LPG, जो कि ब्यूटेन और प्रोपेन का मिश्रण है, की कीमतें कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों से जुड़ी होती हैं, क्योंकि इसे इन ईंधनों के रिफाइनिंग के दौरान बनाया जाता है। अक्टूबर में सऊदी अरामको ने ब्यूटेन और प्रोपेन के लिए बेंचमार्क कॉन्ट्रैक्ट प्राइस अगस्त 2023 के बाद सबसे कम $475 और $495 प्रति टन तय किए।

ऊर्जा क्षेत्र: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की अहम भूमिका

जैसे ही भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत कर रहे हैं, ऊर्जा क्षेत्र इस समझौते को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि दोनों देश “काफी करीब” हैं एक उचित व्यापार समझौते पर पहुंचने के लिए और अमेरिका भारत पर लगाए गए कुछ टैरिफ पर पुनर्विचार कर सकता है।

अगस्त में, अमेरिका ने भारत पर रूस से ऊर्जा खरीदने के लिए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया था, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो गया।

इसके अलावा, भारत ने 2025 में अमेरिका से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाई है। अक्टूबर में भारतीय रिफाइनर ने मार्च 2021 के बाद सबसे अधिक मात्रा में अमेरिका से कच्चा तेल आयात किया। ट्रंप ने भारत से व्यापार घाटा कम करने के लिए यह कदम उठाने के लिए कहा था।