अमेरिकी प्रतिबंधों का बड़ा असर: भारत को रूसी तेल का लदान 3 साल के निचले स्तर पर

अमेरिका द्वारा रोसनेफ्ट और लुक ऑयल पर प्रतिबंध लागू होने से भारतीय रिफाइनर सतर्क, केप्लर के अनुसार नवंबर में रूस से भारत के लिए लदान लगभग आधा रह गया। India Russia Oil Import: भारत भेजे जाने के लिए रूस में कच्चे…

अमेरिकी प्रतिबंधों का बड़ा असर: भारत को रूसी तेल का लदान 3 साल के निचले स्तर पर

Last Updated: March 11, 2026 | 4:35 PM IST

हाइलाइट्स

  • अमेरिका द्वारा रोसनेफ्ट और लुक ऑयल पर प्रतिबंध लागू होने से भारतीय रिफाइनर सतर्क, केप्लर के अनुसार नवंबर में रूस से भारत के लिए लदान लगभग आधा रह गया। India Russia Oil Import: भारत भेजे जाने के लिए रूस में कच्चे…

अमेरिका द्वारा रोसनेफ्ट और लुक ऑयल पर प्रतिबंध लागू होने से भारतीय रिफाइनर सतर्क, केप्लर के अनुसार नवंबर में रूस से भारत के लिए लदान लगभग आधा रह गया।

India Russia Oil Import: भारत भेजे जाने के लिए रूस में कच्चे तेल का लदान नवंबर में 3 साल के निचले स्तर तक लुढ़क गया। इससे पता चलता है कि अमेरिकी प्रतिबंध के कारण भारतीय रिफानिंग कंपनियां सतर्क रुख अपना रही हैं। अमेरिका ने रूस के दो बड़ी तेल कंपनियों रोसनेफ्ट और लुक ऑयल पर प्रतिबंध लगा दिया है। इन कंपनियों पर अमेरिकी प्रतिबंध 21 नवंबर से प्रभावी होंगे।

मैरीटाइम इंटेलिजेंस फर्म केप्लर के अनुसार, नवंबर में अब तक भारत के लिए रूसी तेल का लदान पिछले महीने के मुकाबले लगभग आधा रह गया है। 20 नवंबर तक भारत को भेजे गए रूसी तेल की मात्रा 9.82 लाख बैरल प्रति दिन रही, जबकि अक्टूबर में यह आंकड़ा 18.6 लाख बैरल प्रति दिन था। भारतीय रिफाइनर अमेरिकी ऑफिस ऑफ फॉरेन ऐसेट्स कंट्रोल (ओएफएसी) के प्रतिबंधों के मद्देनजर रूसी कच्चा तेल खरीदने के प्रति अधिक सतर्क हो गए हैं।

केप्लर के प्रमुख अनुसंधान प्रमुख (रिफाइनिंग एवं मॉडलिंग) सुमित रिटोलिया ने कहा, ‘इस गिरवट की मुख्य वजह भारतीय रिफाइनरों की रूसी आपूर्तिकर्ता रोसनेफ्ट और लुक ऑयल पर लगे अमेरिकी प्रतिबंध है। हालांकि वॉल्यूम में अभी भी बदलाव हो सकता है क्योंकि रास्ते में मौजूद कुछ जहाज अपने आखिरी गंतव्य को बदल सकते हैं। मगर मौजूदा रुझान बिल्कुल स्पष्ट है कि भारत के लिए लदान में नरमी आई है।’

सरकारी कंपनी इंडियन ऑयल और निजी कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज अमेरिकी प्रतिबंध को मानने के लिए सहमत हैं, जबकि एचपीसीएल-मित्तल एनर्जी लिमिटेड (एचएमईएल) ने रूस पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध के बाद रूस से तेल खरीद को रोक दिया है। भारत को रूसी तेल की आपूर्ति में दोनों प्रतिबंधित रूसी कंपनियों का योगदान 60 से 70 फीसदी है।

आरआईएल के पास रोसनेफ्ट से करीब 5 लाख बैरल प्रति दिन कच्चा तेल खरीदने का दीर्घावधि अनुबंध है, जबकि नायरा एनर्जी में 49 फीसदी हिस्सा रूस की सरकारी कंपनी का है। इसके विपरीत भारतीय सरकारी रिफाइनिंग कंपनियों का रूस के साथ कोई दीर्घावधि अनुबंध नहीं है। वे ज्यादातर बिचौलियों के जरिये हाजिर बाजार से खरीदारी करती हैं ताकि किसी प्रतिबंध के सीधे असर से बचा जा सके।

सरकारी रिफाइनरी के अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से कहा कि रूस की प्रतिबंधित कंपनियों से कच्चे तेल की खरीद से बचने की कोशिश की जाएगी। अधिकारी ने कहा, ‘हम व्यापारियों से तेल खरीदते हैं लेकिन हमेशा सोर्स के बारे में भी पूछते हैं। अगर कोई ऐसा रास्ता मिलता है जो हमें उन प्रतिबंधित कंपनियों तक ले जाता है तो हम उसे हाथ नहीं लगाएंगे।’ भले ही रूस से लदान में भारी कमी आई है, लेकिन नवंबर में भारत के लिए रवाना होने वाले रूसी तेल की मात्रा 17.39 फीसदी बढ़ गई क्योंकि रिफाइनर 21 नवंबर की अंतिम तिथि से पहले अधिक से अधिक खरीदारी करने में जुट गए।

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India-US LPG Deal: भारत की खाड़ी देशों पर घटेगी निर्भरता, घर-घर पहुंचेगी किफायती गैस

भारत ने अमेरिका से 2.2 मिलियन टन एलपीजी का ऐतिहासिक समझौता कर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया। India-US LPG Deal: भारत ने अमेरिका के साथ 2.2 मिलियन…

Last Updated: November 22, 2025 | 7:01 AM IST

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  • भारत ने अमेरिका से 2.2 मिलियन टन एलपीजी का ऐतिहासिक समझौता कर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया। India-US LPG Deal: भारत ने अमेरिका के साथ 2.2 मिलियन टन (mt) एलपीजी का टर्म डील किया है। यह कदम…
India-US LPG Deal: भारत की खाड़ी देशों पर घटेगी निर्भरता, घर-घर पहुंचेगी किफायती गैस
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भारत ने अमेरिका से 2.2 मिलियन टन एलपीजी का ऐतिहासिक समझौता कर ऊर्जा सुरक्षा मजबूत करने की दिशा में कदम बढ़ाया।

India-US LPG Deal: भारत ने अमेरिका के साथ 2.2 मिलियन टन (mt) एलपीजी का टर्म डील किया है। यह कदम वैश्विक ऊर्जा बाजार में उत्पन्न होने वाली अनिश्चितताओं के बीच भारत की सुरक्षा को मजबूत करेगा। इस समझौते के अनुसार, 2026 से भारत की सरकारी तेल कंपनियां (OMCs) देश में कुल एलपीजी का 10 प्रतिशत अमेरिका से आयात करेंगी।

अब तक भारत का अमेरिका के साथ एलपीजी आयात में कोई टर्म डील नहीं था। देश की घरेलू एलपीजी जरूरत का लगभग 60 प्रतिशत आयात पर निर्भर है और वर्तमान में 90 प्रतिशत एलपीजी आयात पश्चिम एशियाई देशों जैसे संयुक्त अरब अमीरात, कतर, सऊदी अरब और कुवैत से होता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अमेरिका से एलपीजी आयात करने का निर्णय भारत के लिए स्रोत विविधता बढ़ाने में मदद करेगा और पश्चिम एशियाई देशों पर निर्भरता कम करेगा। इक्रा के सीनियर उपाध्यक्ष प्रशांत वशिष्ठ ने कहा कि अमेरिका प्राकृतिक गैस तरल पदार्थों का बड़ा उत्पादक है। अमेरिका से एलपीजी आयात करना चल रही व्यापार वार्ता के अनुरूप है और यह वैश्विक राजनीतिक तनाव के समय भारत के लिए फायदेमंद होगा।

इस साल की शुरुआत में ईरान और इजराइल के बीच संघर्ष के कारण हॉर्मुज की खाड़ी बंद होने का खतरा पैदा हुआ था, जिससे भारत की एलपीजी सप्लाई पर असर पड़ सकता था।

भारत के तेल मंत्री हर्षदीप सिंह पुरी ने कहा कि यह करार देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगा और लाखों घरों को किफायती और साफ-सुथरी खाना पकाने वाली गैस उपलब्ध कराने में मदद करेगा। हालांकि उन्होंने इस करार की कीमत का खुलासा नहीं किया। मंत्री ने बताया कि इस करार में अमेरिकी एलपीजी खरीद की कीमत का आधार माउंट बेल्व्यू, अमेरिका का एक प्रमुख एलपीजी मूल्य निर्धारण केंद्र, होगा।

मरीन इंटेलिजेंस फर्म Kpler की रिपोर्ट के अनुसार, 2025 में भारत ने अब तक 36% एलपीजी यूएई से, 21% कतर से, 16% कुवैत से और 6% अमेरिका से आयात किया है। पिछले तीन सालों में अमेरिका का हिस्सा केवल 0.5% से 2% तक रहा है।

विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका से आने वाली एलपीजी भारत के लिए महंगी होगी क्योंकि समुद्री रास्ता लंबा है। Kpler के सीनियर एनालिस्ट सियारन टायलर के अनुसार, “भारतीय कंपनियों को अमेरिका से आने वाली एलपीजी के लिए मध्य पूर्व से आने वाले मुकाबले ज्यादा कीमत चुकानी होगी। अमेरिका से जहाज भारत पहुंचने में लगभग 45 दिन लगते हैं, जबकि मध्य पूर्व से सिर्फ 7-8 दिन।”

हाल ही में LPG (तरल पेट्रोलियम गैस) की अंतरराष्ट्रीय कीमतों में गिरावट और अमेरिका के साथ लागत पर चल रहे समझौतों से भारत की कंपनियों को महंगे फ्रेट का असर कम करने में मदद मिल सकती है।

ICRA के विशेषज्ञ वशिष्ठ के अनुसार, “अप्रैल से अंतरराष्ट्रीय LPG की कीमतें कम हुई हैं। सऊदी CP (कॉन्ट्रैक्ट प्राइस) में भारी कमी आई है और कच्चे तेल की कीमतें $60-$65 प्रति बैरल के आसपास स्थिर रहने की संभावना है। इससे भारत अमेरिका से LPG आयात बढ़ा सकता है। फ्रेट लागत जरूर अधिक होगी, लेकिन अमेरिका भारत को बेहतर कीमत देने का प्रयास कर सकता है ताकि असर कम हो।”

LPG, जो कि ब्यूटेन और प्रोपेन का मिश्रण है, की कीमतें कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की कीमतों से जुड़ी होती हैं, क्योंकि इसे इन ईंधनों के रिफाइनिंग के दौरान बनाया जाता है। अक्टूबर में सऊदी अरामको ने ब्यूटेन और प्रोपेन के लिए बेंचमार्क कॉन्ट्रैक्ट प्राइस अगस्त 2023 के बाद सबसे कम $475 और $495 प्रति टन तय किए।

ऊर्जा क्षेत्र: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते की अहम भूमिका

जैसे ही भारत और अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) पर बातचीत कर रहे हैं, ऊर्जा क्षेत्र इस समझौते को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि दोनों देश “काफी करीब” हैं एक उचित व्यापार समझौते पर पहुंचने के लिए और अमेरिका भारत पर लगाए गए कुछ टैरिफ पर पुनर्विचार कर सकता है।

अगस्त में, अमेरिका ने भारत पर रूस से ऊर्जा खरीदने के लिए 25 प्रतिशत अतिरिक्त शुल्क लगाया था, जिससे कुल टैरिफ 50 प्रतिशत हो गया।

इसके अलावा, भारत ने 2025 में अमेरिका से कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ाई है। अक्टूबर में भारतीय रिफाइनर ने मार्च 2021 के बाद सबसे अधिक मात्रा में अमेरिका से कच्चा तेल आयात किया। ट्रंप ने भारत से व्यापार घाटा कम करने के लिए यह कदम उठाने के लिए कहा था।