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सस्ते स्टील पर बड़ा प्रहार! भारत ने वियतनाम पर 5 साल का अतिरिक्त टैक्स लगाया

डंपिंग से घरेलू उद्योग को नुकसान का खतरा बढ़ा, सरकार ने विदेशी स्टील पर 121.55 डॉलर/टन का शुल्क लागू किया Steel Anti Dumping Duty: भारत सरकार ने वियतनाम से आने वाले कुछ तरह के स्टील पर पांच साल के लिए अतिरिक्त…

Last Updated: March 11, 2026 | 4:35 PM

हाइलाइट्स

डंपिंग से घरेलू उद्योग को नुकसान का खतरा बढ़ा, सरकार ने विदेशी स्टील पर 121.55 डॉलर/टन का शुल्क लागू किया

Steel Anti Dumping Duty: भारत सरकार ने वियतनाम से आने वाले कुछ तरह के स्टील पर पांच साल के लिए अतिरिक्त टैक्स (एंटी-डंपिंग ड्यूटी) लगा दिया है। सरकार ने यह फैसला इसलिए लिया है ताकि बाहर से सस्ता स्टील आने से भारत की स्टील कंपनियों को नुकसान न हो। वित्त मंत्रालय द्वारा जारी नोटिफिकेशन के अनुसार, DGTR ने 13 अगस्त की रिपोर्ट में पाया कि वियतनाम से भारत आने वाला स्टील सामान्य कीमत से कम दाम पर बेचा जा रहा था। इससे भारतीय उद्योग को नुकसान हो रहा था और भविष्य में नुकसान और बढ़ने का खतरा भी था।

कौन-सी कंपनियों पर ड्यूटी लगेगी और कौन-सी छूट में रहेंगी?

सरकार ने कहा है कि वियतनाम की Hoa Phat Dung Quat Steel JSC नाम की कंपनी को यह टैक्स नहीं देना होगा। लेकिन वियतनाम की बाकी सभी कंपनियों और निर्यातकों को 121.55 डॉलर प्रति टन का टैक्स देना पड़ेगा। यही टैक्स उन कंपनियों पर भी लगेगा जो वियतनाम से सामान भेजती हैं, भले ही वे वियतनाम की कंपनी न हों।

यह भी पढ़ें: 2025 में 7% की रफ्तार से बढ़ेगी भारत की GDP, मूडीज ने जताया अनुमान

किस तरह के स्टील उत्पाद ड्यूटी के दायरे में आएंगे?

यह टैक्स उन खास तरह के स्टील पर लगेगा जिनकी मोटाई 25 मिलीमीटर तक और चौड़ाई 2,100 मिलीमीटर तक होती है। ये स्टील 7208, 7211, 7225 और 7226 नाम के टैरिफ कोड में आते हैं। ध्यान देने वाली बात है कि स्टेनलेस स्टील पर यह टैक्स नहीं लगेगा। यह एंटी-डंपिंग टैक्स नोटिफिकेशन जारी होने की तारीख से पांच साल तक लागू रहेगा। यह पैसा भारतीय रुपए में देना होगा, और कितना देना है, यह उस दिन की डॉलर–रुपया विनिमय दर पर तय होगा जिस दिन बिल ऑफ एंट्री जमा किया जाएगा।

 

First Published - November 22, 2025 | 7:38 AM IST
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ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्य में बदलाव, 2030 तक 30 लाख टन उत्पादन का नया टारगेट

वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का…

aarti gosavi

Last Updated: March 11, 2026 | 4:34 PM IST

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हाइलाइट्स

  • वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लेकर वैश्विक नीतिगत…
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वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लेकर वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण 50 लाख टन सालाना (एमएमटीपीए) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का भारत का लक्ष्य दो साल पीछे यानी 2032 तक खिसकने की संभावना है।

Green Hydrogen पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के सचिव संतोष सारंगी ने मंगलवार को कहा कि पहले के लक्ष्यों में संशोधन करके अब देश में 2030 तक 30 लाख टन सालाना  ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार ने जनवरी 2023 में नैशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) की शुरुआत की थी। इसका मकसद भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन व निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। इसके तहत 2030 तक सालाना 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था।

सारंगी ने कहा कि यूरोप में नीतिगत अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) द्वारा नेट जीरो फ्रेमवर्क (एनजेडएफ) को 1 साल तक के लिए टालने के फैसले के बाद भारत के लक्ष्य में बदलाव किया गया है।

उन्होंने कहा कि निर्यात पर केंद्रित भारतीय कंपनियां ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन लक्ष्यों को फिर से समायोजित कर सकती हैं, जबकि अन्य घरेलू कंपनियों जल्द ही परियोजनाएं शुरू कर सकती हैं।

सारंगी ने कहा, ‘ग्रीनको, एक्मे, सेंबकॉर्प जैसी कंपनियां सक्रिय रूप से साझेदार तलाश रही हैं और वे अपेक्षाकृत सफल रही हैं।’

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