दूसरी तिमाही में भी बरकरार रहेगी भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार, जीडीपी ग्रोथ रेट 7% से ज्यादा रहने का अनुमान

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही थी। राष्ट्रीय सां​ख्यिकी कार्यालय 28 नवंबर को दूसरी तिमाही के जीडीपी के आंकड़े जारी कर सकता है उपभोग मांग में सुधार, सामान्य से बेहतर मॉनसून, मजबूत औद्योगिक वृद्धि…

दूसरी तिमाही में भी बरकरार रहेगी भारतीय अर्थव्यवस्था की रफ्तार, जीडीपी ग्रोथ रेट 7% से ज्यादा रहने का अनुमान

Last Updated: March 11, 2026 | 4:35 PM IST

हाइलाइट्स

  • चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही थी। राष्ट्रीय सां​ख्यिकी कार्यालय 28 नवंबर को दूसरी तिमाही के जीडीपी के आंकड़े जारी कर सकता है उपभोग मांग में सुधार, सामान्य से बेहतर मॉनसून, मजबूत औद्योगिक वृद्धि…

चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही थी। राष्ट्रीय सां​ख्यिकी कार्यालय 28 नवंबर को दूसरी तिमाही के जीडीपी के आंकड़े जारी कर सकता है

उपभोग मांग में सुधार, सामान्य से बेहतर मॉनसून, मजबूत औद्योगिक वृद्धि और निरंतर सार्वजनिक पूंजीगत व्यय के दम पर भारतीय अर्थव्यवस्था की वृ​द्धि की रफ्तार चालू वित्त वर्ष की दूसरी तिमाही (जुलाई-सितंबर) में भी बरकरार रहेगी। अर्थशास्त्रियों का मानना है कि जुलाई-सितंबर तिमाही में सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की वृद्धि दर 7 फीसदी से अ​धिक रह सकती है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में वृद्धि दर 7.8 फीसदी रही थी। राष्ट्रीय सां​ख्यिकी कार्यालय 28 नवंबर को दूसरी तिमाही के जीडीपी के आंकड़े जारी कर सकता है।

भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने 1 अक्टूबर को संपन्न अपनी द्विमासिक मौद्रिक नीति समीक्षा में जीडीपी वृद्धि दर के अनुमान को पहले के 6.7 फीसदी से बढ़ाकर 7 फीसदी कर दिया है। आरबीआई ने कहा था कि सितंबर तिमाही में घरेलू आर्थिक गतिविधि में गति बनी हुई है।

अधिकतर अर्थशास्त्रियों का मानना ​​है कि अनुकूल आधार प्रभाव और कम अपस्फीति दर, जिसने पहली तिमाही में वृद्धि दर को बढ़ावा दिया था, उसका असर दूसरी तिमाही में भी बना रह सकता है। भारतीय निर्यात पर अमेरिका में शुल्क 27 अगस्त से बढ़कर 50 फीसदी हो गया मगर दूसरी तिमाही में इसका पूरा प्रभाव नहीं दिखा। मगर अमेरिका जाने वाली माल की खेप पहली तिमाही की तुलना में कम हुई है। माल एवं सेवा कर (जीएसटी) दरों में कटौती का पूरा प्रभाव दूसरी तिमाही में नहीं दिखेगा क्योंकि नई दरें 22 सितंबर को लागू हुई थीं।

आईडीएफसी बैंक की मुख्य अर्थशास्त्री गौरा सेनगुप्ता ने दूसरी तिमाही में जीडीपी वृद्धि दर 7.3 फीसदी रहने का अनुमान लगाया है। उन्होंने कहा कि दूसरी तिमाही में दोपहिया और ट्रैक्टरों की बिक्री में तेजी से ग्रामीण बाजारों में सुधार का संकेत दिख रहा है।

केयरएज रेटिंग्स की मुख्य अर्थशास्त्री रजनी सिन्हा ने दूसरी तिमाही के लिए 7.2 फीसदी जीडीपी वृद्धि का अनुमान जाहिर किया। उन्होंने कहा कि उच्च टैरिफ के बावजूद गैर-पेट्रोलियम और गैर-कृषि क्षेत्रों में भारत से अमेरिका को निर्यात रफ्तार में है। उन्होंने कहा कि पूंजीगत व्यय के लिए भारी आवंटन के कारण निर्माण क्षेत्र में मजबूती बरकरार रहने की उम्मीद है।

इंडिया रेटिंग्स के सहायक निदेशक पारस जसराय ने दूसरी तिमाही के लिए 7.2 फीसदी जीडीपी वृद्धि का अनुमान जाहिर किया। उन्होंने कहा कि घरेलू मांग में मजबूती के कारण अर्थव्यवस्था मु​श्किल हालात से उम्मीद से बेहतर तरीके से उबर रही है। उन्होंने कहा कि अनिश्चितता के माहौल में निवेश मांग को रफ्तार देने में सरकार के पूंजीगत व्यय की भूमिका काफी महत्त्वपूर्ण दिख रही है।

सेनगुप्ता ने कहा कि उच्च टैरिफ श्रम की अ​धिकता वाले एमएसएमई क्षेत्र को प्रभावित करेंगे। इसका वस्तुओं के कुल निर्यात में 45 फीसदी योगदान है। इससे 12 महीने की अवधि में वास्तविक जीडीपी वृद्धि में 1 फीसदी की गिरावट आने की आशंका है।

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ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्य में बदलाव, 2030 तक 30 लाख टन उत्पादन का नया टारगेट

वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का…

Last Updated: November 22, 2025 | 7:45 AM IST

हाइलाइट्स

  • वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लेकर वैश्विक नीतिगत…
ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्य में बदलाव, 2030 तक 30 लाख टन उत्पादन का नया टारगेट
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वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लेकर वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण 50 लाख टन सालाना (एमएमटीपीए) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का भारत का लक्ष्य दो साल पीछे यानी 2032 तक खिसकने की संभावना है।

Green Hydrogen पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के सचिव संतोष सारंगी ने मंगलवार को कहा कि पहले के लक्ष्यों में संशोधन करके अब देश में 2030 तक 30 लाख टन सालाना  ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार ने जनवरी 2023 में नैशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) की शुरुआत की थी। इसका मकसद भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन व निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। इसके तहत 2030 तक सालाना 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था।

सारंगी ने कहा कि यूरोप में नीतिगत अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) द्वारा नेट जीरो फ्रेमवर्क (एनजेडएफ) को 1 साल तक के लिए टालने के फैसले के बाद भारत के लक्ष्य में बदलाव किया गया है।

उन्होंने कहा कि निर्यात पर केंद्रित भारतीय कंपनियां ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन लक्ष्यों को फिर से समायोजित कर सकती हैं, जबकि अन्य घरेलू कंपनियों जल्द ही परियोजनाएं शुरू कर सकती हैं।

सारंगी ने कहा, ‘ग्रीनको, एक्मे, सेंबकॉर्प जैसी कंपनियां सक्रिय रूप से साझेदार तलाश रही हैं और वे अपेक्षाकृत सफल रही हैं।’