ऋण गारंटी के लिए सरकार को 2,000 करोड़ रुपये की दरकार, निर्यातकों को मिलेगी राहत

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को निर्यातकों, खास तौर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की सहायता के लिए 45,060 करोड़ की दो योजनाओं को मंजूरी दी थी सरकार के अनुमान के अनुसार निर्यातकों की सहायता के लिए 20,000 करोड़…

ऋण गारंटी के लिए सरकार को 2,000 करोड़ रुपये की दरकार, निर्यातकों को मिलेगी राहत

Last Updated: March 11, 2026 | 4:35 PM IST

हाइलाइट्स

  • केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को निर्यातकों, खास तौर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की सहायता के लिए 45,060 करोड़ की दो योजनाओं को मंजूरी दी थी सरकार के अनुमान के अनुसार निर्यातकों की सहायता के लिए 20,000 करोड़…

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को निर्यातकों, खास तौर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की सहायता के लिए 45,060 करोड़ की दो योजनाओं को मंजूरी दी थी

सरकार के अनुमान के अनुसार निर्यातकों की सहायता के लिए 20,000 करोड़ रुपये की ऋण गारंटी योजना के विस्तार की खातिर उसे 2,000 करोड़ रुपये आवंटित करने की आवश्यकता होगी। मामले से अवगत सूत्रों ने यह जानकारी दी।

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने बुधवार को निर्यातकों, खास तौर पर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) की सहायता के लिए 45,060 करोड़ की दो योजनाओं को मंजूरी दी थी। इसमें बैंक ऋणों पर 20,000 करोड़ रुपये की क्रेडिट गारंटी भी शामिल है।

सूत्रों ने बताया कि राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी लिमिटेड (एनसीजीटीसी) के पास निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना (सीजीएसई) की जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त धनराशि मौजूद है। मगर सूत्रों ने बताया कि संसद के आगामी शीत सत्र के दौरान पूरक बजट में अतिरिक्त आवंटन की मांग की जा सकती है।

यह योजना एनसीजीटीसी द्वारा दिशानिर्देश जारी होने की तिथि से 31 मार्च, 2026 तक या 20,000 करोड़ रुपये की गारंटी जारी होने तक (जो भी पहले हो) लागू रहेगी। कर्ज लेने वाले प्रत्येक इकाई के लिए अधिकतम ऋण राशि 50 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है।

यह योजना निर्यातकों के लिए उपलब्ध होगी और विस्तृत पात्रता मानदंड वित्तीय सेवा विभाग के सचिव एम नागराजू की अध्यक्षता वाली समिति द्वारा तय किए जाएंगे।

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ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्य में बदलाव, 2030 तक 30 लाख टन उत्पादन का नया टारगेट

वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का…

Last Updated: November 22, 2025 | 7:45 AM IST

हाइलाइट्स

  • वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लेकर वैश्विक नीतिगत…
ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्य में बदलाव, 2030 तक 30 लाख टन उत्पादन का नया टारगेट
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वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लेकर वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण 50 लाख टन सालाना (एमएमटीपीए) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का भारत का लक्ष्य दो साल पीछे यानी 2032 तक खिसकने की संभावना है।

Green Hydrogen पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के सचिव संतोष सारंगी ने मंगलवार को कहा कि पहले के लक्ष्यों में संशोधन करके अब देश में 2030 तक 30 लाख टन सालाना  ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार ने जनवरी 2023 में नैशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) की शुरुआत की थी। इसका मकसद भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन व निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। इसके तहत 2030 तक सालाना 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था।

सारंगी ने कहा कि यूरोप में नीतिगत अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) द्वारा नेट जीरो फ्रेमवर्क (एनजेडएफ) को 1 साल तक के लिए टालने के फैसले के बाद भारत के लक्ष्य में बदलाव किया गया है।

उन्होंने कहा कि निर्यात पर केंद्रित भारतीय कंपनियां ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन लक्ष्यों को फिर से समायोजित कर सकती हैं, जबकि अन्य घरेलू कंपनियों जल्द ही परियोजनाएं शुरू कर सकती हैं।

सारंगी ने कहा, ‘ग्रीनको, एक्मे, सेंबकॉर्प जैसी कंपनियां सक्रिय रूप से साझेदार तलाश रही हैं और वे अपेक्षाकृत सफल रही हैं।’