ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्य में बदलाव, 2030 तक 30 लाख टन उत्पादन का नया टारगेट

वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लेकर वैश्विक नीतिगत…

ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्य में बदलाव, 2030 तक 30 लाख टन उत्पादन का नया टारगेट

Last Updated: March 11, 2026 | 4:34 PM IST

हाइलाइट्स

  • वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लेकर वैश्विक नीतिगत…

वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लेकर वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण 50 लाख टन सालाना (एमएमटीपीए) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का भारत का लक्ष्य दो साल पीछे यानी 2032 तक खिसकने की संभावना है।

Green Hydrogen पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के सचिव संतोष सारंगी ने मंगलवार को कहा कि पहले के लक्ष्यों में संशोधन करके अब देश में 2030 तक 30 लाख टन सालाना  ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार ने जनवरी 2023 में नैशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) की शुरुआत की थी। इसका मकसद भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन व निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। इसके तहत 2030 तक सालाना 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था।

सारंगी ने कहा कि यूरोप में नीतिगत अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) द्वारा नेट जीरो फ्रेमवर्क (एनजेडएफ) को 1 साल तक के लिए टालने के फैसले के बाद भारत के लक्ष्य में बदलाव किया गया है।

उन्होंने कहा कि निर्यात पर केंद्रित भारतीय कंपनियां ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन लक्ष्यों को फिर से समायोजित कर सकती हैं, जबकि अन्य घरेलू कंपनियों जल्द ही परियोजनाएं शुरू कर सकती हैं।

सारंगी ने कहा, ‘ग्रीनको, एक्मे, सेंबकॉर्प जैसी कंपनियां सक्रिय रूप से साझेदार तलाश रही हैं और वे अपेक्षाकृत सफल रही हैं।’

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Retail Inflation: खुदरा महंगाई अक्टूबर में घटकर कई साल के निचले स्तर 0.25% पर आई, GST कटौती का मिला फायदा

Retail Inflation: माल एवं सेवा कर (GST) की दरों में कटौती और सब्जियों एवं फलों की कीमतों में नरमी के कारण खुदरा महंगाई में यह गिरावट आई है Retail Inflation: खुदरा…

Last Updated: November 22, 2025 | 7:44 AM IST

हाइलाइट्स

  • Retail Inflation: माल एवं सेवा कर (GST) की दरों में कटौती और सब्जियों एवं फलों की कीमतों में नरमी के कारण खुदरा महंगाई में यह गिरावट आई है Retail Inflation: खुदरा महंगाई अक्टूबर में घटकर कई साल के निचले स्तर 0.25…
Retail Inflation: खुदरा महंगाई अक्टूबर में घटकर कई साल के निचले स्तर 0.25% पर आई, GST कटौती का मिला फायदा
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Retail Inflation: माल एवं सेवा कर (GST) की दरों में कटौती और सब्जियों एवं फलों की कीमतों में नरमी के कारण खुदरा महंगाई में यह गिरावट आई है

Retail Inflation: खुदरा महंगाई अक्टूबर में घटकर कई साल के निचले स्तर 0.25 फीसदी पर आ गई है। बुधवार को जारी सरकारी आंकड़ों से यह जानकारी मिली। माल एवं सेवा कर (GST) की दरों में कटौती और सब्जियों एवं फलों की कीमतों में नरमी के कारण खुदरा महंगाई में यह गिरावट आई है।

उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) आधारित खुदरा महंगाई सितंबर में 1.44 फीसदी और अक्टूबर, 2024 में 6.21 फीसदी थी। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (NSO) की ओर से जारी आंकड़ों के अनुसार, अक्टूबर में फूड इंफ्लेशन घटकर शून्य से नीचे 5.02 फीसदी पर आ गई।

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NSO ने कहा कि अक्टूबर, 2025 के दौरान कुल महंंगाई और फूड इंफ्लेशन में गिरावट मुख्य रूप से जीएसटी दर में कटौती, अनुकूल आधार प्रभाव एवं तेल व वसा, सब्जियों, फलों, अंडे, जूते, अनाज, परिवहन व संचार की महंगाई दर में नरमी के कारण हुई।

(PTI इनपुट के साथ)