निर्यातकों को मिली बड़ी राहत, कैबिनेट ने ₹45,060 करोड़ की दो योजनाओं को दी मंजूरी

यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विभिन्न क्षेत्रों के कम से कम आधा दर्जन निर्यात संवर्धन परिषदों के प्रमुखों की बैठक के एक सप्ताह बाद की गई है केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निर्यातकों, खास तौर पर एमएसएमई को सहायता और…

निर्यातकों को मिली बड़ी राहत, कैबिनेट ने ₹45,060 करोड़ की दो योजनाओं को दी मंजूरी

Last Updated: March 11, 2026 | 4:35 PM IST

हाइलाइट्स

  • यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विभिन्न क्षेत्रों के कम से कम आधा दर्जन निर्यात संवर्धन परिषदों के प्रमुखों की बैठक के एक सप्ताह बाद की गई है केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निर्यातकों, खास तौर पर एमएसएमई को सहायता और…

यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विभिन्न क्षेत्रों के कम से कम आधा दर्जन निर्यात संवर्धन परिषदों के प्रमुखों की बैठक के एक सप्ताह बाद की गई है

केंद्रीय मंत्रिमंडल ने निर्यातकों, खास तौर पर एमएसएमई को सहायता और संरक्षण प्रदान करने के लिए 45,060 करोड़ रुपये की योजनाओं को आज मंजूरी दी। ये निर्यातक अमेरिका द्वारा भारत के कई उत्पादों पर 50 फीसदी शुल्क लगाए जाने के कारण चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। इन योजनाओं में 25,060 करोड़ रुपये का बहुप्रतीक्षित निर्यात संवर्धन मिशन (ईपीएम) और निर्यातकों के लिए ऋण गारंटी योजना (सीजीएसई) के विस्तार के लिए 20,000 करोड़ रुपये शामिल हैं।

यह घोषणा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ विभिन्न क्षेत्रों के कम से कम आधा दर्जन निर्यात संवर्धन परिषदों के प्रमुखों की बैठक के एक सप्ताह बाद की गई है, जो अमेरिकी शुल्क से सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। इसके साथ ही देश में उत्पादन बढ़ाने के लिए कुछ महत्त्वपूर्ण खनिजों पर रॉयल्टी को दुरुस्त बनाने के प्रस्ताव को भी हरी झंडी दी गई।

निर्यात संवर्धन मिशन की घोषणा केंद्रीय बजट में चालू वित्त वर्ष के लिए 2,250 करोड़ रुपये के आवंटन के साथ की गई थी। अब बढ़े हुए आवंटन के साथ यह वित्त वर्ष 2031 तक जारी रहेगा। इसका उद्देश्य भारत की निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता, पहली बार निर्यात करने वाले निर्यातकों और श्रम-प्रधान क्षेत्रों, जैसे वस्त्र, चमड़ा, रत्न एवं आभूषण, इंजीनियरिंग सामान और समुद्री उत्पादों को मजबूत करना है।

25,060 करोड़ रुपये के निर्यात संवर्धन मिशन को दो उप-योजनाओं निर्यात प्रोत्साहन (10,401 करोड़ रुपये) और निर्यात दिशा (14,659 करोड़ रुपये) के माध्यम से क्रियान्वित किया जाएगा। मंत्रिमंडल के ​फैसलों की जानकारी देते हुए सूचना एवं प्रसारण मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि यह एक व्यापक मिशन है और पूरे निर्यात परिवेश को सहयोग प्रदान करेगा।

इस कदम से घरेलू निर्यातकों को अमेरिकी शुल्क से उत्पन्न वैश्विक व्यापार अनिश्चितताओं से बचाने में मदद मिलेगी। अमेरिका ने 27 अगस्त से भारतीय वस्तुओं के निर्यात पर 50 फीसदी का भारी शुल्क लगा दिया है। ‘निर्यात प्रोत्साहन’ के अंतर्गत ब्याज सहायता, निर्यात फैक्टरिंग, ब्याज गारंटी, ई-कॉमर्स निर्यातकों के लिए क्रेडिट कार्ड और नए बाजारों में विविधीकरण के लिए ऋण वृद्धि सहायता दी जाएगी।

इसी प्रकार ‘निर्यात दिशा’ के तहत गैर-वित्तीय क्षमताओं पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा, जो बाजार की तत्परता और प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाती हैं, जिसमें निर्यात गुणवत्ता और अनुपालन सहायता, अंतरराष्ट्रीय ब्रांडिंग, पैकेजिंग के लिए सहायता और व्यापार मेलों में भागीदारी, निर्यात भंडारण, अंतर्देशीय परिवहन प्रतिपूर्ति और व्यापार खुफिया और क्षमता निर्माण पहल शामिल हैं।

निर्यातकों के लिए 20,000 करोड़ रुपये की ऋण गारंटी योजना की अव​धि बढ़ाकर 31 मार्च, 2026 कर दी गई है। इसमें निर्यातकों को स्वीकृत निर्यात सीमा के 20 फीसदी तक की अतिरिक्त कार्यशील पूंजी के रूप में रेहन मुक्त ऋण सहायता शामिल होगी।

इसमें 50 करोड़ रुपये तक के कर्ज पर ऋण गारंटी दी जाएगी। यह योजना वित्तीय सेवा विभाग द्वारा राष्ट्रीय ऋण गारंटी ट्रस्टी कंपनी के माध्यम से कार्यान्वित की जाएगी ताकि एमएसएमई सहित पात्र निर्यातकों को सदस्य ऋणदाता संस्थानों द्वारा अतिरिक्त ऋण सहायता प्रदान की जा सके। वित्तीय सेवा विभाग के सचिव की अध्यक्षता में गठित एक प्रबंधन समिति इस योजना पर नजर रखेगी।

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ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्य में बदलाव, 2030 तक 30 लाख टन उत्पादन का नया टारगेट

वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का…

Last Updated: November 22, 2025 | 7:45 AM IST

हाइलाइट्स

  • वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लेकर वैश्विक नीतिगत…
ग्रीन हाइड्रोजन लक्ष्य में बदलाव, 2030 तक 30 लाख टन उत्पादन का नया टारगेट
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वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं और अंतरराष्ट्रीय दबाव के चलते भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन का लक्ष्य संशोधित किया है। अब 2030 तक 30 लाख टन, 2032 तक 50 लाख टन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया

ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन को लेकर वैश्विक नीतिगत अनिश्चितताओं के कारण 50 लाख टन सालाना (एमएमटीपीए) ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का भारत का लक्ष्य दो साल पीछे यानी 2032 तक खिसकने की संभावना है।

Green Hydrogen पर अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन के मौके पर नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के सचिव संतोष सारंगी ने मंगलवार को कहा कि पहले के लक्ष्यों में संशोधन करके अब देश में 2030 तक 30 लाख टन सालाना  ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन करने का लक्ष्य रखा गया है। भारत सरकार ने जनवरी 2023 में नैशनल ग्रीन हाइड्रोजन मिशन (एनजीएचएम) की शुरुआत की थी। इसका मकसद भारत को ग्रीन हाइड्रोजन का उत्पादन व निर्यात का वैश्विक केंद्र बनाना है। इसके तहत 2030 तक सालाना 50 लाख टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन का लक्ष्य रखा गया था।

सारंगी ने कहा कि यूरोप में नीतिगत अनिश्चितता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री संगठन (आईएमओ) द्वारा नेट जीरो फ्रेमवर्क (एनजेडएफ) को 1 साल तक के लिए टालने के फैसले के बाद भारत के लक्ष्य में बदलाव किया गया है।

उन्होंने कहा कि निर्यात पर केंद्रित भारतीय कंपनियां ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन लक्ष्यों को फिर से समायोजित कर सकती हैं, जबकि अन्य घरेलू कंपनियों जल्द ही परियोजनाएं शुरू कर सकती हैं।

सारंगी ने कहा, ‘ग्रीनको, एक्मे, सेंबकॉर्प जैसी कंपनियां सक्रिय रूप से साझेदार तलाश रही हैं और वे अपेक्षाकृत सफल रही हैं।’